रजिस्ट्री प्रक्रिया पर उठे सवाल, कैसे पास हुए कागज?
जबलपुर। गोरखपुर तहसील अंतर्गत लम्हेटाघाट क्षेत्र में जमीन की रजिस्ट्री के नाम पर एक बड़ा जालसाजी का मामला सामने आया है। शातिर बदमाशों ने असली जमीन मालिक की जगह एक फर्जी महिला को खड़ा कर करोड़ों रुपए की ठगी को अंजाम दिया। यह पूरा घटनाक्रम रजिस्ट्री कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है, क्योंकि अधिकारियों की मौजूदगी में दस्तावेजों का हेरफेर कर इस बड़े खेल को अंजाम दिया गया और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। इस मामले में मुख्य आरोपी मनीष चौधरी को बताया जा रहा है, जिसने पूरी साजिश के तहत लम्हेटा स्थित खसरा नंबर 183 और 184/6 की जमीन का फर्जी एग्रीमेंट तैयार करवाया। आरोपी ने राकेश गुप्ता और संदीप पटेल समेत अन्य लोगों को जमीन बेचने का झांसा दिया और एग्रीमेंट के बहाने उनसे मोटी रकम वसूल ली।
असली मालिक को बिना बताए तैयार की नकली नर्मदा बाई
धोखाधड़ी की इस पूरी प्रक्रिया में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि रजिस्ट्री कार्यालय में जिस महिला को नर्मदा बाई बनाकर पेश किया गया, उसका असली जमीन मालिक से कोई संबंध नहीं था। एक नकली पहचान के सहारे पूरी डील को अंतिम रूप दिया गया और जमीन खरीदने के इच्छुक लोगों को करोड़ों के सपने दिखाकर लाखों रुपए हड़प लिए गए। जमीन के असली मालिक को इस पूरी कार्रवाई की जानकारी तक नहीं थी। जब पीड़ितों ने अपनी रकम देने के बाद जमीन की रजिस्ट्री की मांग की, तो आरोपियों ने नया पैंतरा चलते हुए उन्हें गुमराह करना शुरू कर दिया। पीड़ितों को यह झांसा दिया गया कि उक्त जमीन फ्लाईओर निर्माण के कारण अधिग्रहित हो चुकी है और मुआवजा मिलते ही उनके पैसे वापस कर दिए जाएंगे। इसी बहाने का सहारा लेकर आरोपी लंबे समय तक रकम दबाए रहे।
सगे बेटे पर लगा मां के नाम पर साजिश रचने का आरोप
इस पूरे प्रकरण में एक नया मोड़ तब आया जब जांच के दौरान असली नर्मदा बाई के बेटे विशाल पटेल की भूमिका संदिग्ध पाई गई। आरोप है कि विशाल पटेल के इशारे पर ही यह पूरा खेल रचा गया था और उसने अपनी ही मां के नाम पर एक दूसरी महिला को खड़ा कर इस बड़ी ठगी की पटकथा लिखी। इस खुलासे के बाद परिवार के ही सदस्य द्वारा की गई इस धोखाधड़ी ने पुलिस और प्रशासन को हैरान कर दिया है। गोरखपुर एसडीएम अनुराग सिंह के अनुसार इस मामले की जांच 6 माह पहले ही पूरी कर ली गई थी और जांच रिपोर्ट एडीएम को भेज दी गई है। जांच में स्पष्ट हुआ है कि रजिस्ट्री की प्रक्रिया गलत तरीके से की गई थी, जिस पर अब वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा आगामी कार्रवाई की जानी है।
रजिस्ट्री व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों पर उठे सवाल
इस करोड़ों की ठगी ने सरकारी तंत्र और रजिस्ट्री प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी संदेह व्यक्त किया जा रहा है, क्योंकि बिना किसी गहन सत्यापन के फर्जी महिला के नाम पर रजिस्ट्री कैसे हो गई, यह जांच का मुख्य विषय है। वर्तमान में पीड़ित न्याय के लिए भटक रहे हैं, जबकि नामजद आरोपी अभी भी कानून की पकड़ से बाहर बताए जा रहे हैं। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इस तरह के भू-माफियाओं और जालसाजों के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में आम जनता की मेहनत की कमाई इसी तरह लुटी रहेगी। फिलहाल पूरा मामला एडीएम कार्यालय के विचाराधीन है और पुलिस की अग्रिम कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।


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