पाकिस्तान के बलूचिस्तान में मुठभेड़, सेना ने 15 आतंकियों को मार गिराया
पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने बलूचिस्तान प्रांत में दो अलग-अलग अभियानों में 15 विद्रोही को मार गिराया है। सेना की मीडिया विंग (आईएसपीआर) ने शनिवार को यह जानकारी दी। ये ऑपरेशन खुफिया जानकारी मिलने के बाद गुरुवार को किए गए थे। पहला ऑपरेशन हरनाई जिले में हुआ। यहां सेना ने खवारिज के ठिकाने पर हमला किया। भीषण मुठभेड़ के बाद 12 विद्रोही मारे गए। पाकिस्तान सरकार ने साल 2024 में प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को 'फितना अल-खवारिज' नाम दिया है। यह नाम इतिहास के एक हिंसक समूह के संदर्भ में रखा गया है।दूसरा ऑपरेशन बसिमा जिले में चलाया गया। यहां सेना ने आतंकवादियों की मौजूदगी का पता लगाया और उन पर हमला किया। इस जोरदार गोलीबारी में तीन और आतंकवादी ढेर हो गए। सेना ने मारे गए आतंकियों के पास से भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक बरामद किए हैं। बलूचिस्तान में लंबे समय से अशांति बनी हुई है। यहां आतंकवादी अक्सर सुरक्षा बलों और सरकारी इमारतों को निशाना बनाते रहते हैं। पाकिस्तान सरकार इन हमलों के लिए बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और टीटीपी जैसे संगठनों को जिम्मेदार मानती है।
केन्या की राजधानी नैरोबी में भारी बारिश का कहर, 8 की मौत
केन्या की राजधानी नैरोबी में शुक्रवार रात से हो रही मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में अब तक आठ लोगों की मौत हो चुकी है। पुलिस प्रमुख जॉर्ज सेडा के अनुसार, मृतको में छह लोग डूब गए और दो लोगों की जान बिजली का करंट लगने से गई। राहत और बचाव कार्य अभी जारी है। हालांकि मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। सड़कों पर कमर तक पानी भरने की वजह से 100 से ज्यादा गाड़ियां खराब हो गई हैं। केन्या एयरवेज ने अपनी उड़ानें रोक दी हैं और कुछ विमानों को मोम्बासा शहर की ओर भेज दिया गया है।हालात को देखते हुए सरकार ने आपातकालीन सेवाओं की मदद के लिए सेना को तैनात किया है। टोल रोड ऑपरेटर ने भी एलिवेटेड रोड पर लगने वाली फीस माफ कर दी है ताकि लोगों को निकलने में आसानी हो। रेड क्रॉस की टीमें फंसे हुए लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन सड़कों की खराब हालत और ट्रैफिक की वजह से उन्हें काफी दिक्कतें आ रही हैं। सार्वजनिक सेवा मंत्री जेफ्री रुकू खुद राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। स्थानीय लोग इस बाढ़ के लिए शहर के खराब ड्रेनेज सिस्टम को जिम्मेदार मान रहे हैं। केन्या में फरवरी के अंत से ही बारिश का मौसम शुरू हो गया है, जिससे पहले भी काफी नुकसान हो चुका है।


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