स्पीकर बिरला के खिलाफ विपक्ष की रणनीति, अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस जारी
नई दिल्ली। संसद में जारी गतिरोध के बीच विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया है। मंगलवार को सचिवालय को स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे दिया गया है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बताया कि स्पीकर को हटाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 94-सी के तहत लोकसभा सचिवालय को नोटिस दिया गया है। विपक्षी सांसदों के पत्र के जवाब में भाजपा की महिला सांसदों ने खोला मोर्चा, स्पीकर से की ये मांग संसद में आज भी टकराव टलना मुश्किल, कार्यवाही चलाने को लेकर शर्तों पर फंसा पेंच संसद में साजिश: पीएम मोदी को सदन न आने की सलाह क्यों? सुरक्षा को लेकर स्पीकर की चिंता जायज; कटघरे में विपक्ष 'अगर संसद में चर्चा नहीं हुई, तो विपक्ष को होगा नुकसान', रिजिजू ने कांग्रेस पर साधा निशाना क्या है लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया: विपक्ष ला सकता है अविश्वास प्रस्ताव, जानें नियम; पहले कब हुआ ऐसा?
नोटिस पर 120 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विपक्ष के करीब 120 सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। हस्ताक्षर करने वाले सांसदों में कांग्रेस, डीएमके, सपा के सांसद शामिल हैं।
नोटिस में विपक्ष ने कहा है, लोकसभा स्पीकर लगातार विपक्षी सांसदों को जनहित के मुद्दे उठाने से रोक रहे हैं। नोटिस में बताया गया कि अनुच्छेद 94(सी) के तहत नोटिस दिया गया है क्योंकि स्पीकर खुलेआम पक्षपात कर रहे हैं।
विपक्ष के आठ सांसदों को मनमाने ढंग से निलंबित कर दिया गया है; उन्हें केवल लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने के लिए दंडित किया जा रहा है।
कई मौकों पर विपक्षी दलों के नेताओं को बोलने की अनुमति ही नहीं दी गई, जबकि यह उनका मौलिक अधिकार है।
कांग्रेस सांसद और चीफ व्हिप के सुरेश ने कई विपक्षी पार्टियों की तरफ से लोकसभा सचिवालय को यह नोटिस दिया।
गौरतलब है कि टीएमसी के सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और न ही वे इस नोटिस का हिस्सा हैं।
राहुल गांधी को न बोलने देने के मुद्दे पर संसद में हंगामा लोकसभा में राहुल गांधी को न बोलने देने का आरोप लगाते हुए विपक्ष हंगामा कर रहा है।
दरअसल 2 फरवरी को राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख की अप्रकाशित किताब में कथित तौर पर लिखी गई बातों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार के दबाव में लोकसभा स्पीकर ने राहुल गांधी को सदन में नहीं बोलने दिया।
इसके बाद 4 फरवरी को पीएम मोदी का लोकसभा में संबोधन होना था, लेकिन इसे टाल दिया गया।
अगले दिन लोकसभा स्पीकर ने कहा कि कई विपक्षी सांसदों का सदन में व्यवहार उग्र और लोकतांत्रिक गरिमा के अनुरूप नहीं था। ऐसे में प्रधानमंत्री की सुरक्षा को देखते हुए उनका संबोधन रद्द कर दिया गया।
विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर के दावे को खारिज कर दिया और स्पीकर के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई।
विपक्षी सांसदों ने स्पीकर को चिट्ठी लिखकर उन पर पक्षपाती व्यवहार करने का आरोप लगाया।


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