NEET काउंसिलिंग विवाद में बड़ा फैसला, दोषियों पर गिरी गाज
नीट काउंसिलिंग: ₹3.8 अरब की सिक्योरिटी मनी न लौटाने पर बड़ी कार्रवाई, प्रोफेसर और स्टेनो निलंबित
लखनऊ| उत्तर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने नीट काउंसिलिंग में शामिल हजारों अभ्यर्थियों की सिक्योरिटी मनी वापस न करने के मामले में कड़ा कदम उठाया है। अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने इस गंभीर लापरवाही पर संज्ञान लेते हुए जिम्मेदार अधिकारी प्रोफेसर डॉ. राहुल कुमार और आशुलिपिक (स्टेनो) मोहम्मद इरफान अंसारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
प्रमुख कार्रवाई और निर्देश
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बैंक खाते फ्रीज: एसबीआई (SBI) और आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक के संबंधित खातों को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।
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धनराशि की वापसी: सभी प्रभावित अभ्यर्थियों की सुरक्षा राशि (Security Money) जल्द से जल्द वापस करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है।
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अनुशासनात्मक जांच: दोषी पाए गए अन्य कर्मचारियों के विरुद्ध भी कड़ी विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
पिछले वर्ष की एमबीबीएस (MBBS) और बीडीएस (BDS) पाठ्यक्रमों की काउंसिलिंग के दौरान करीब 30,000 अभ्यर्थियों ने सुरक्षा राशि के रूप में कुल 3.8 अरब रुपये जमा किए थे। नियमों के मुताबिक, काउंसिलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह राशि वापस की जानी थी, लेकिन लंबे समय बाद भी अभ्यर्थियों को उनके पैसे नहीं मिले।
महानिदेशालय की कार्यप्रणाली पर सवाल
चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय की भूमिका पहले भी कई विवादों में रही है। उप निदेशकों की नियुक्ति से लेकर नर्सिंग भर्ती और उपकरणों की खरीद में अनियमितताओं की शिकायतें आती रही हैं। वर्तमान में महानिदेशक के अवकाश पर होने के कारण अपर मुख्य सचिव स्वयं कार्यभार संभाल रहे हैं, जिन्होंने विभाग में फैली अव्यवस्थाओं पर सख्त नाराजगी जताई है।
आगे की कार्रवाई: कई और अधिकारियों पर लटकी तलवार
महानिदेशालय के कामकाज में सुधार के लिए अपर मुख्य सचिव ने अन्य संदिग्ध मामलों की फाइलें भी फिर से खोल दी हैं:
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लिपिकों की वापसी: विभिन्न मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध किए गए लिपिकों को उनके मूल पदों पर वापस भेजने और उनमें से दोषियों को निलंबित करने की तैयारी है।
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दोषियों की पहचान: अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध रिपोर्ट तलब की गई है, जिससे आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नामों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
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पुरानी फाइलों की जांच: विभाग में अटकी पुरानी फाइलों की समीक्षा की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाहियों को रोका जा सके।


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