कोरिया शिक्षा व्यवस्था पर सवाल, नामांकन बेहद कम
बिलासपुर|छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में शिक्षा व्यवस्था की हालत अब अंतिम सांसें गिन रही है. ऐसा इसलिए क्योंकि कोरिया जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूरी स्थित सोनहत जनपद के ग्राम पंचायत रामगढ़ तुर्रीपानी में संचालित प्राथमिक पाठशाला के भवन में कई साल से ताला लटक रहा है, जबकि यहां 18 बच्चों का नाम दर्ज है. स्कूल में ताला लटकने की वजह शिक्षक जंगली हाथियों को जिम्मेदार बता रहें हैं. वहीं इस स्कूल के शिक्षक को दूसरे स्कूल में अटैच कर रखा गया है, लेकिन कागजों में प्राइमरी के बच्चों को मीडिल स्कूल के भवन में पढ़ाया जा रहा है, लेकिन विस्तार न्यूज की टीम जब स्कूल पहुंची तो प्राइमरी स्कूल का एक स्टूडेंट व मीडिल स्कूल का एक ही स्टूडेंट स्कूल पहुंचा था. मीडिल स्कूल का एक शिक्षक इन दोनों स्कूल के दो बच्चों का पहरा कर रहा था स्कूल में 18 बच्चे के नाम दर्ज, अटैचमेंट के नाम पर स्कूल बंद गुरु घासीदास नेशनल पार्क को पार करने के बाद रामगढ़ ग्राम पंचायत पड़ता है. इसी रामगढ़ पंचायत का आश्रित क्षेत्र है तुर्रीपानी, यहां मोबाइल का नेटवर्क तक नहीं है और यही वजह है कि यहां शिक्षक पढ़ाने के लिए कब पहुंचते हैं और कब चले जाते हैं इसकी कोई मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है. हैरानी की बात यह है कि यहां प्राथमिक पाठशाला की बिल्डिंग बनी, लेकिन हाथियों ने बिल्डिंग को हल्का नुकसान पहुंचाया और उसके बाद उस बिल्डिंग में शिक्षकों ने स्कूल लगाना बंद कर दिया. अब प्राथमिक पाठशाला मीडिल स्कूल में संचालित किया जा रहा है लेकिन यहां बच्चे पढ़ने के लिए नहीं पहुंच रहे हैं. 9 फरवरी की दोपहर करीब 3:00 बजे यहां मीडिल स्कूल के भवन में प्राथमिक स्कूल का एक बच्चा मौजूद था. मीडिल स्कूल में पढ़ने वाले कुल चार बच्चों में से सिर्फ एक छात्र स्कूल में थी.उपस्थित शिक्षक कनौजिया ने बताया कि प्राइमरी स्कूल के शिक्षक ने खुद को दूसरे जगह अटैच करा लिया है. इसके बाद अधिकारियों ने इस प्राइमरी स्कूल में दूसरे शिक्षक को अटैच किया लेकिन उस शिक्षक ने भी इस स्कूल में ज्वाइन नहीं किया. हैरानी कि बात यह है कि सरकार ने पदस्थापना के जगह से हटाकर दूसरे जगह या दफ्तर में अटैच करने की प्रथा को समाप्त कर दिया है लेकिन उसके बावजूद जिला स्तर के अधिकारियों से सेटिंग कर कई शिक्षक खुद को सुविधाजनक स्कूलों में अभी भी अटैच कराकर नौकरी कर रहे हैं. इसकी वजह से प्राथमिक स्कूलों में बच्चे नहीं पहुंच रहे हैं और स्कूलों में ताला लगने की नौबत दिख रही है वहीं दूसरी तरफ सिस्टम के लोग हाथी को स्कूल बंद होने के लिए जिम्मेदार बता रहे हैं मीडिल में 3 शिक्षक लेकिन सिर्फ चार स्टूडेंट मीडिल स्कूल की स्थापना यहां पर 2022 में हुई थी लेकिन 3 साल से अधिक का वक्त बीत जाने के बाद भी इस स्कूल में सिर्फ चार बच्चे ही अपना नाम दर्ज कराए हुए हैं इसमें भी सिर्फ एक छात्रा पढ़ने के लिए स्कूल आती है. कागजो में इस स्कूल में तीन शिक्षक पोस्टेड हैं लेकिन स्कूल एक ही आते हैं क्योंकि बच्चे ही नहीं आते और अभिभावक कहते हैं कि शिक्षक पढ़ाने नहीं आते इसलिए वे यहां अपने बच्चों का नाम नहीं लिखाते हैं.संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा संजय गुप्ता का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी मिली है और इस पूरे मामले की जांच के लिए वे जिला शिक्षा अधिकारी को मौके पर भेजेंगे और इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.


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