हौसलों को मिला सहारा, दिव्यांगजनों की बदली जिंदगी
रायपुर : छत्तीसगढ़ में समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित “छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम” की योजनाएं आज हजारों दिव्यांगजनों के जीवन में उम्मीद की नई किरण बनकर उभर रही हैं। राज्य सरकार की संवेदनशील पहल और सशक्त क्रियान्वयन ने दिव्यांगजनों को न केवल आर्थिक संबल दिया है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी प्रदान किया है।
रायपुर की गिरजा जलक्षेत्री इस बदलाव की जीवंत मिसाल हैं। 60 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद उन्होंने अपने आत्मविश्वास और शासन की योजना के सहारे अपने जीवन को नई दिशा दी। वर्ष 2017 में निगम से 1 लाख 75 हजार रुपये का ऋण लेकर उन्होंने ई-रिक्शा संचालन शुरू किया। कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने निरंतर परिश्रम किया और समय पर ऋण चुकाकर 25 प्रतिशत अनुदान का लाभ भी प्राप्त किया।
गिरजा जलक्षेत्री यहीं नहीं रुकीं उन्होंने आगे बढ़ते हुए 2 लाख 75 हजार रुपये का अतिरिक्त ऋण लेकर अपने कार्य का विस्तार किया। आज वे रायपुर के कोर्ट परिसर में चाय एवं नाश्ता केंद्र संचालित कर रही हैं। यह केंद्र सिर्फ उनका व्यवसाय नहीं, बल्कि कई अन्य दिव्यांगजनों के लिए रोजगार का माध्यम बन चुका है। वर्तमान में लगभग 10 दिव्यांगजन उनके साथ कार्य कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
राज्य सरकार की इस योजना के तहत दिव्यांगजनों को 10 हजार रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक का ऋण अत्यंत रियायती ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। महिला हितग्राहियों के लिए 5 प्रतिशत और पुरुषों के लिए 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर निर्धारित है। साथ ही, समय पर ऋण अदायगी करने पर 25 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान, इस योजना को और अधिक प्रभावी बनाता है।
इस योजना के माध्यम से राज्यभर में दिव्यांगजन किराना दुकान, सिलाई-कढ़ाई, फैंसी स्टोर, सायकल रिपेयरिंग, चाय-नाश्ता केंद्र जैसे अनेक छोटे-छोटे व्यवसाय स्थापित कर रहे हैं। इससे वे न केवल अपनी आजीविका चला रहे हैं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रहे हैं।
रायपुर जिले में अब तक 187 से अधिक दिव्यांगजनों को इस योजना का लाभ मिल चुका है, जो इस पहल की सफलता को दर्शाता है। छत्तीसगढ़ आज समावेशी विकास की दिशा में एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है, जहां हर वर्ग को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।


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