केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: पाकिस्तान से आने वाले निवेश पर लगेगी रोक
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश की सीमाओं की सुरक्षा और आर्थिक संप्रभुता को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों को पहले से कहीं अधिक कठोर कर दिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम अधिसूचना के अनुसार, अब पाकिस्तान सहित भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले किसी भी देश से आने वाला निवेश बिना सरकारी जांच और पूर्व अनुमति के संभव नहीं होगा। राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उठाए गए इस कदम का मुख्य उद्देश्य संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी तरह की अवांछित विदेशी दखलंदाजी को रोकना और देश की आर्थिक संरचना को बाहरी खतरों से सुरक्षित रखना है।
पड़ोसी देशों से निवेश पर पूर्ण प्रतिबंध और कड़ी निगरानी
नए प्रावधानों के अंतर्गत पाकिस्तान के नागरिकों और वहां पंजीकृत कंपनियों के लिए भारत में निवेश के रास्ते अत्यंत सीमित और कठिन कर दिए गए हैं। रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे रणनीतिक महत्व के क्षेत्रों में पाकिस्तान से किसी भी प्रकार का निवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा, जबकि गैर-संवेदनशील क्षेत्रों के लिए भी सरकार की मंजूरी के साथ-साथ सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी जांच अनिवार्य होगी। यह नियम केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि चीन, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार, भूटान और अफगानिस्तान जैसे सीमावर्ती देशों पर भी समान रूप से लागू होगा। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बदलाव 'बेनिफिशियल ओनर' की पहचान को लेकर है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि कोई विदेशी निवेशक किसी अन्य देश के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय बाजार में प्रवेश न कर सके।
मालिकाना हक में बदलाव और पारदर्शिता के नए मानक
सरकार ने निवेश के बाद होने वाले बदलावों को लेकर भी अपनी स्थिति साफ कर दी है, जिसके तहत यदि किसी भारतीय कंपनी के मालिकाना हक या शेयरधारिता में कोई बदलाव होता है और उसका नया मालिक इन प्रतिबंधित देशों से ताल्लुक रखता है, तो इसके लिए भी सरकार से पहले अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यह कदम विशेष रूप से कंपनियों के 'बैकडोर' अधिग्रहण को रोकने के लिए उठाया गया है, ताकि निवेश की आड़ में कंपनियां अपनी आंतरिक संरचना को गुपचुप तरीके से न बदल सकें। वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू हुई इस नीति को अब और अधिक व्यापक और स्पष्ट बनाया गया है, जिससे भारतीय कंपनियों के अधिग्रहण की किसी भी संभावना पर अंकुश लगाया जा सके।
सुरक्षा और आर्थिक विकास के बीच संतुलन की नीति
एक ओर जहां सरकार ने सीमावर्ती देशों से आने वाली पूंजी पर शिकंजा कसा है, वहीं दूसरी ओर देश की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए गैर-संवेदनशील क्षेत्रों में उदारता भी दिखाई है। बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई को 'ऑटोमैटिक रूट' के माध्यम से अनुमति देना इसी रणनीति का हिस्सा है, ताकि क्षेत्र में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ सके और विकास को नई दिशा मिले। हालांकि, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) जैसे महत्वपूर्ण संस्थान के लिए सरकार ने विदेशी निवेश की सीमा 20 प्रतिशत तक ही सीमित रखी है। इस प्रकार सरकार ने एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए जहां आर्थिक विकास के लिए विदेशी पूंजी का स्वागत किया है, वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों पर अपना पूर्ण नियंत्रण बरकरार रखा है।


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