BRICS समिट से पहले कलाकार ने रचा इतिहास, कैनवास पर बनाई विश्व नेताओं की तस्वीर
अमृतसर: कला की कोई सीमा नहीं होती; रंग और कैनवास अक्सर उन भावों को बयां कर देते हैं जिन्हें शब्दों में ढालना कठिन होता है। पंजाब के अमृतसर निवासी प्रसिद्ध चित्रकार डॉ. जगजोत सिंह रूबल ने इस बात को सिद्ध कर दिखाया है। आगामी ब्रिक्स (BRICS 2026) सम्मेलन से पूर्व उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सहित विश्व के शीर्ष नेताओं की एक विशाल ऐक्रेलिक पेंटिंग तैयार की है। चित्रकार ने इसे भारत की ऐतिहासिक मेजबानी के प्रति अपना कलात्मक अभिनंदन बताया है।
रंगों और कैनवास के माध्यम से विश्व नेताओं का विशेष अभिनंदन
डॉ. जगजोत सिंह रूबल के अनुसार, यह विशाल कलाकृति मात्र एक पेंटिंग नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय सद्भाव का प्रतीक है। उन्होंने ब्रिक्स मंच से जुड़े प्रमुख वैश्विक नेताओं को एक साथ एक ही स्थान पर चित्रित किया है। डॉ. रूबल ने कहा कि भारत इस प्रतिष्ठित शिखर सम्मेलन का आयोजक है, इसलिए एक कलाकार होने के नाते वे भी इस ऐतिहासिक क्षण में अपना योगदान देना चाहते थे। इसी प्रेरणा से उन्होंने विभिन्न देशों के राष्ट्रप्रमुखों को एक ही कैनवास पर साकार किया।
पेंटिंग को प्रधानमंत्री मोदी और आयोजन स्थल तक पहुंचाने का संकल्प
चित्रकार रूबल की प्रबल इच्छा है कि उनकी यह कलाकृति ब्रिक्स सम्मेलन के मुख्य आयोजन स्थल पर प्रदर्शित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सम्मेलन स्थल पर इसे प्रदर्शित करने का अवसर नहीं मिलता, तो वे इस पेंटिंग को कूरियर के माध्यम से सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक भिजवाएंगे। उन्होंने बताया कि पूर्व में भी उनकी कलाकृतियों की सराहना स्वयं प्रधानमंत्री और भारत के राष्ट्रपति कर चुके हैं तथा उन्हें प्रशंसा पत्र भी प्राप्त हो चुके हैं।
एक ही कैनवास पर दिग्गजों को उतारने की जटिल चुनौती की पूरी
विभिन्न प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय हस्तियों को एक ही कैनवास पर सही अनुपात, भाव-भंगिमा और पहचान के साथ उकेरना कलात्मक दृष्टिकोण से अत्यंत कठिन माना जाता है। डॉ. रूबल ने इस चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा कर अपनी कला का लोहा मनवाया है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर पंजाब की कला और संस्कृति की अमिट छाप
भारत के लिए ब्रिक्स सम्मेलन एक अत्यंत महत्वपूर्ण वैश्विक आयोजन है। ऐसे समय में अमृतसर के इस कलाकार का यह प्रयास पंजाब की समृद्ध कलात्मक परंपरा को विश्व पटल पर प्रस्तुत करता है। यह पहल दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय आयोजनों का महत्व केवल कूटनीति और राजनीति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कला और संस्कृति के माध्यम से भी इसे अमर बनाया जा सकता है।


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