मुंबई। महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में उस समय बयानों का दौर तेज हो गया जब सुनेत्रा पवार ने विपक्षी नेताओं से अजित पवार से जुड़े घटनाक्रम का राजनीतिकरण न करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवार के दुख और भावनाओं को समझे बिना की जा रही बयानबाजी पूरी तरह से अनुचित है। माना जा रहा है कि उनका यह इशारा सुप्रिया सुले के हालिया बयानों की तरफ था।

सुनेत्रा पवार ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग

पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुनेत्रा पवार ने कहा कि अजित दादा से जुड़े विषय पर जो शून्य और दर्द परिवार महसूस कर रहा है, उसकी तुलना किसी और से नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा, "उनकी मां, बच्चों और मेरे अलावा इस स्थिति को कोई और बेहतर नहीं समझ सकता। इसलिए इस संवेदनशील मामले पर राजनीति करने से सभी को बचना चाहिए।"

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मामले की उचित जांच के लिए मुख्यमंत्री से लेकर केंद्रीय नेतृत्व (प्रधानमंत्री और गृह मंत्री) तक से संवाद किया गया है और शासन स्तर पर प्रयास जारी हैं।

कानून और संवैधानिक प्रक्रियाओं पर पूरा भरोसा

सुनेत्रा पवार ने जोर देकर कहा कि उन्हें देश की कानून व्यवस्था और जांच एजेंसियों पर पूरा भरोसा है। उन्होंने मीडिया ट्रायल पर सवाल उठाते हुए कहा कि बार-बार बयानों और मीडिया के सामने आने से जांच के तथ्य नहीं बदलते, बल्कि केवल बेवजह की शंकाएं पैदा होती हैं। उन्होंने सभी से धैर्य रखने और जांच एजेंसियों को अपना काम करने का समय देने का अनुरोध किया।

सुप्रिया सुले के आरोपों के बाद बढ़ा विवाद

यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब एनसीपी (एसपी) नेता सुप्रिया सुले ने सत्ता पक्ष की मंशा और जांच की गति पर सवाल खड़े किए थे। सुले ने आरोप लगाया था कि सत्ता में बैठे प्रतिनिधि इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। सुले के इसी आक्रामक बयान के जवाब में सुनेत्रा पवार ने परिवार की ओर से यह कड़ी प्रतिक्रिया दी है।