वॉशिंगटन: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की द्विपक्षीय मुलाकात पर अमेरिका ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। इस बैठक के बाद अमेरिका ने ईरान के साथ व्यापार करने या उसे आर्थिक पाबंदियों से बचाने वाले देशों को कड़े परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।

अमेरिकी विदेश मंत्री की सख्त चेतावनी

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया कि भारत एक संप्रभु राष्ट्र है और उसे अपनी विदेश नीति तय करने का पूरा अधिकार है, लेकिन ईरान को आर्थिक मदद देने पर अमेरिका सख्त रुख अपनाएगा:

  • प्रतिबंधों का खतरा: यदि कोई भी देश ईरान को अमेरिकी पाबंदियों से बचाने, कमाई के रास्ते बनाने या वित्तीय मदद पहुंचाने में सहयोग करता है, तो अमेरिका उस देश पर भी प्रतिबंध लगाएगा।

  • आतंकवाद और परमाणु मुद्दा: अमेरिका की मुख्य चिंता यह है कि ईरान इस पैसे का इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने और परमाणु हथियार विकसित करने में न करे।

  • परोक्ष दबाव: इससे पहले भी अमेरिका यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस की आर्थिक मदद का आरोप लगाकर भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगा चुका है।

पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की बिश्केक मुलाकात

बिश्केक में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान भारत और ईरान के बीच रणनीतिक और व्यापारिक सहयोग बढ़ाने पर गहन चर्चा हुई:

  • मुद्दों पर सहमति: दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के मौजूदा तनाव, समुद्री व्यापार, नाविकों की सुरक्षा और जहाजों की निर्बाध आवाजाही पर बातचीत की।

  • द्विपक्षीय व्यापार: प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि भारत और ईरान अपनी ऐतिहासिक दोस्ती को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं तथा आने वाले समय में द्विपक्षीय व्यापार का दायरा बढ़ाना चाहते हैं।

  • शांति की पहल: भारत ने पश्चिम एशिया क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए किए जा रहे सभी प्रयासों को अपना समर्थन दोहराया।