बिश्केक।पाकिस्तान के साथ पारंपरिक जुड़ाव रखने वाला तुर्किये अब भारत के साथ अपने कूटनीतिक और व्यापारिक रिश्ते सुधारने की दिशा में नए कदम उठा रहा है। तुर्किये शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का पूर्णकालिक सदस्य बनने की मंशा रखता है। राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन के अनुसार, SCO में शामिल होने का उनका प्रयास पश्चिमी देशों या अन्य वैश्विक गठबंधनों से दूरी बनाने का संकेत नहीं है।

भारत के प्रति तुर्किये का रुख और सकारात्मक एजेंडा

तुर्किये के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने भारत के साथ प्रगाढ़ संबंधों की वकालत करते हुए स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के बीच न तो कोई सीमा विवाद है और न ही कोई नकारात्मक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि। फिदान ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान के साथ तुर्किये की ऐतिहासिक एकजुटता रही है, लेकिन उन्होंने भारत से अपील की कि वह इन संबंधों को नकारात्मक दृष्टिकोण से न देखे। तुर्किये पुराने मतभेदों को दरकिनार कर सकारात्मक एजेंडे पर आगे बढ़ना चाहता है।

आर्थिक हित और द्विपक्षीय व्यापार की महत्ता

संबंधों में सुधार के पीछे एक बड़ा कारण आर्थिक जरूरतें हैं:

  • भारतीय बाज़ार और निवेश: तुर्किये भारतीय कारोबार, इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश तक पहुँच बढ़ाने का इच्छुक है।

  • पर्यटन: भारतीय पर्यटकों का तुर्की की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान है।

  • व्यापारिक लेनदेन: तुर्किये भारत को मार्बल, मशीनरी और कृषि उत्पाद निर्यात करता है, जबकि भारत से केमिकल्स, मशीनरी और ऑटोमोबाइल पार्ट्स का आयात करता है।

ऐतिहासिक मतभेद और हालिया कूटनीतिक प्रयास

अतीत में जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर तुर्किये के बयानों और पाकिस्तान को ड्रोन आपूर्ति जैसी सैन्य साझेदारियों के कारण दोनों देशों में तनाव रहा है। हालांकि, कूटनीतिक बर्फ अब पिघलती दिख रही है:

  • विदेश कार्यालय वार्ता: अप्रैल 2026 में चार साल के लंबे अंतराल के बाद दोनों देशों के बीच विदेश कार्यालय स्तर की बातचीत फिर शुरू हुई।

  • कानूनी सहयोग: ड्रग तस्कर सलीम डोला के प्रत्यर्पण में तुर्किये ने भारत की मदद की और अन्य अपराधियों को वापस लाने पर चर्चा जारी है।

  • सैन्य रुख पर सफाई: तुर्किये ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान के साथ उसका सैन्य सहयोग पुराने समझौतों का हिस्सा है, न कि भारत के खिलाफ कोई नई रणनीति।