बलिया: उभांव थाना क्षेत्र के पशुहारी गांव में बेटी के विवाह की तैयारियों में जुटे एक निर्धन परिवार की खुशियां महज 72 घंटों के भीतर मातम में तब्दील हो गईं। स्वाइन फ्लू के अलर्ट के बीच शनिवार को पत्नी की अकाल मृत्यु के बाद मंगलवार को बुजुर्ग मां ने भी दम तोड़ दिया। परिजन अभी वृद्धा के अंतिम संस्कार से वापस लौटे ही थे कि वाराणसी स्थित ट्रामा सेंटर से 23 वर्षीय बेटी प्रीति की मौत की हृदयविदारक खबर आ गई। एक के बाद एक लगातार तीन मौतों से शिवचंद राजभर का परिवार पूरी तरह बिखर गया है। जिस आंगन में मांगलिक गीतों की गूंज होने वाली थी, वहां अब केवल चीख-पुकार और सन्नाटा पसरा हुआ है।

पशुहारी ग्राम निवासी शिवचंद राजभर अपनी पत्नी आशा देवी (46), माता जोनिहा (76), पुत्र मनन और पुत्री प्रीति के साथ रहते थे। परिवार की माली हालत कमजोर होने के कारण शिवचंद लंबे समय से कर्नाटक में वेल्डिंग का काम कर आजीविका चला रहे थे। लगभग एक माह पूर्व वह अपने बेटे के साथ गांव आए थे और बेटी प्रीति का विवाह तय किया था। घर में शादी की खरीदारी और तैयारियां जोरों पर चल रही थीं।

पत्नी की सांसें थमने से शुरू हुआ त्रासदियों का सिलसिला

परिजनों के मुताबिक आशा देवी लंबे समय से अस्वस्थ थीं। उन्हें दिमागी व्याधि और पाइल्स की समस्या थी। बीते कुछ दिनों से उनकी तबीयत अत्यधिक बिगड़ गई और सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी। आर्थिक तंगी के चलते स्थानीय स्तर पर ही उनका उपचार चल रहा था कि शनिवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। अभी परिवार इस गहरे सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि मंगलवार को शिवचंद की वयोवृद्ध मां जोनिहा की तबीयत बिगड़ी और कुछ ही देर में उनका भी निधन हो गया।

दाह-संस्कार से लौटते ही आई बेटी की मौत की खबर

दूसरी ओर, प्रीति भी गंभीर बीमारी से जूझ रही थी। उसे तेज बुखार, कमर दर्द और शरीर में रक्त व प्लेटलेट्स की भारी कमी थी। स्थिति चिंताजनक होने पर परिजन उसे वाराणसी के ट्रामा सेंटर ले गए थे, जहां उसे कई यूनिट रक्त चढ़ाया गया, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। मंगलवार को दादी जोनिहा का दाह-संस्कार कर लौटे परिजनों को प्रीति के शांत होने की सूचना मिली। इस दुखद खबर से पूरा गांव स्तब्ध रह गया और पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के लिए ग्रामीणों का तांता लग गया।

मेहनत-मजदूरी से बच्चों का भविष्य संवार रहा था शिवचंद

कर्नाटक में मजदूरी कर पाई-पाई जोड़ रहे शिवचंद का सपना बच्चों का भविष्य संवारना और बेटी के हाथ पीले करना था। वह अपने बेटे मनन को भी वाहन मरम्मत का काम सिखाने के लिए साथ ले गए थे। एक महीने पहले गांव लौटकर जब उन्होंने बेटी का रिश्ता तय किया तो परिवार में खुशी का माहौल था। लेकिन कुदरत के क्रूर फैसले ने तीन ही दिनों में पत्नी, मां और बेटी को छीनकर शिवचंद पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया।

स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप, डॉक्टरों की टीम जांच में जुटी

एक ही घर में तीन मौतों की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला हरकत में आया। एसडीएम के निर्देश पर चिकित्सकों का एक दल शिवचंद के आवास पर पहुंचा। मृतक प्रीति के भाई मनन भी इस समय तेज बुखार, सर्दी व खांसी से पीड़ित हैं, जिसके कारण वह अपनी बहन के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो सके।

अस्पताल अधीक्षक डॉ. राकेश कुमार सिंह के अनुसार, प्राथमिक पड़ताल में पत्नी आशा देवी और पुत्री प्रीति की मृत्यु का मुख्य कारण गंभीर रूप से खून की कमी (एनीमिया) सामने आया है, जबकि बुजुर्ग मां की मृत्यु सांस रुकने से हुई है। मेडिकल टीम इस बात की भी गहन जांच कर रही है कि कहीं परिवार में डेंगू या अन्य किसी संक्रामक बीमारी का प्रकोप तो नहीं फैला था।

गांव में पसरा गहरा मातम

पशुहारी गांव में हुई इस दिल दहला देने वाली घटना से हर कोई हतप्रभ है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में इतने कम समय में किसी एक परिवार पर आई ऐसी विपदा पहले कभी नहीं देखी। जो परिवार अपनी सीमित आय के बावजूद बेटी की शादी को लेकर उत्साहित था, वहां तीन दिन में तीन अर्थियां उठने से पूरा इलाका शोक के गहरे सागर में डूब गया है।