5 साल का सितंबर ट्रेंड इस बार कसौटी पर, क्या बाजार फिर दिखाएगा दम?
ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार घरेलू शेयर बाजार के लिए सितंबर सीरीज आमतौर पर बढ़त दर्ज कराने वाली रही है। बीते पांच वर्षों के रुख पर नजर डालें तो केवल 2022 (3.5% की गिरावट) को छोड़कर हर साल सितंबर में औसतन 2.5 से 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। इतना ही नहीं, अगस्त के निचले स्तरों से सितंबर के अंत तक सूचकांकों में 4 से 5 फीसदी का स्विंग देखने को मिला है। इसी तकनीकी आधार पर बाजार में 23,950 के सपोर्ट लेवल से 24,200–24,250 तक संभावित उछाल की उम्मीद लगाई जा रही थी। हालांकि, वैश्विक संकेतों और भू-राजनीतिक तनाव ने इस तकनीकी अनुमान की कड़ी परीक्षा लेना शुरू कर दिया है।
बुधवार को घरेलू बाजार में लगातार तीसरे सत्र में बिकवाली देखने को मिली। एनएसई निफ्टी 141.35 अंक फिसलकर 23,914.45 अंक पर बंद हुआ, जो कि 23,950 के अहम तकनीकी सपोर्ट स्तर से नीचे है। वहीं बीएसई सेंसेक्स 373.93 अंकों के नुकसान के साथ 76,570.35 के स्तर पर सिमट गया, जबकि कारोबार के दौरान इसमें 808 अंकों तक का गोता लग चुका था। मुख्य रूप से एचडीएफसी बैंक, इंफोसिस, महिंद्रा एंड महिंद्रा और एशियन पेंट्स जैसे दिग्गज शेयरों में बिकवाली ने सूचकांकों पर दबाव बनाए रखा।
कच्चा तेल और कमजोर वैश्विक संकेत बने बड़ी बाधा
बाजार के पुराने सकारात्मक ट्रेंड की राह में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां सबसे बड़ी रुकावट बनकर उभरी हैं:
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कच्चे तेल में उबाल: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा गहरा गया है, जिससे ब्रेंट क्रूड वायदा बढ़कर 95 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। तेल की यह महंगाई देश के चालू खाते के घाटे (CAD) पर सीधा दबाव डाल सकती है।
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वैश्विक बाजारों में मंदी: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और ऊर्जा संकट के चलते एशियाई बाजारों में जापान का निक्की, कोरिया का कॉस्पी और हांगकांग का हैंग सेंग लाल निशान में बंद हुए। अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों से भी किसी राहत के संकेत नहीं मिल रहे हैं।
बाजार को सहारा देने वाले दो मजबूत पहलू
अंतरराष्ट्रीय बिकवाली के बावजूद घरेलू मोर्चे पर कुछ मजबूत कारक बाजार को निचले स्तरों पर स्थिरता दे रहे हैं:
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रिकॉर्ड एसआईपी प्रवाह: खुदरा निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत बना हुआ है। जुलाई में 31,961 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड मासिक एसआईपी इनफ्लो दर्ज हुआ, जिसने घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) को गिरावट के समय खरीदारी करने का पर्याप्त सहारा दिया है।
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वायदा बाजार का प्रीमियम: स्पॉट मार्केट में गिरावट के बावजूद निफ्टी सितंबर फ्यूचर्स लगभग 80 अंक प्रीमियम पर (23,994 के आसपास) कारोबार कर रहा है, जो यह दर्शाता है कि बाजार में निचले स्तरों पर मंदड़ियों का पूरा दबदबा नहीं है।
विशेषज्ञों का आकलन: सीमित दायरे में रहेगा बाजार, चुनिंदा शेयरों पर दांव
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, आईटी और एफएमसीजी जैसे भारी भारांक (वेटेज) वाले क्षेत्रों में कमजोरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली के कारण चालू माह में मुख्य सूचकांकों में किसी एकतरफा बड़ी रैली के आसार कम हैं। व्यापक बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है, हालांकि मिडकैप और स्मॉलकैप में चुनिंदा खरीदारी जारी रहने की उम्मीद है। तकनीकी दृष्टिकोण और सेक्टोरल रोटेशन के आधार पर लंबी अवधि के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज, टेक महिंद्रा, पीएफसी (पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन) और एमफैसिस जैसे काउंटरों में मजबूती के संकेत बने हुए हैं।


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