बीते आठ से दस दिनों की नरमी के बाद देश के प्रमुख बाजारों में चीनी की कीमतों में एक बार फिर तेजी लौट आई है। खुदरा (रिटेल) बाजार में चीनी के दामों में 1 से लेकर 4 रुपये प्रति किलोग्राम तक का उछाल आया है, जबकि थोक (होलसेल) कीमतों में भी 50 से 200 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। त्योहारी मांग और आगामी पेराई सत्र से पहले कीमतों पर अंकुश लगाने व जमाखोरी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी डीलरों की स्टॉक लिमिट को आधा करने का निर्णय लिया है।

प्रमुख शहरों में खुदरा (रिटेल) भाव की स्थिति

खुदरा बाजार में अधिकांश शहरों में चीनी की कीमतें 61 से 63 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच पहुंच गई हैं:

  • दिल्ली, मुंबई, रांची व कोलकाता: इन महानगरों में भाव बढ़कर 61 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किए गए।

  • कानपुर, रायपुर व गुवाहाटी: कानपुर में 2 रुपये, रायपुर में 4 रुपये और गुवाहाटी में 1 रुपये के उछाल के साथ भाव 62 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गए।

  • हैदराबाद व चेन्नई: हैदराबाद में 2 रुपये बढ़कर 61 रुपये और चेन्नई में 1 रुपये की तेजी के साथ भाव 63 रुपये प्रति किलोग्राम रहे।

थोक मंडियों (होलसेल) में तेजी का रुख

थोक बाजार में भी आपूर्ति और मांग के दबाव के चलते कीमतों में इजाफा हुआ है:

  • दिल्ली व कानपुर: दिल्ली में थोक भाव 5,650 रुपये से बढ़कर 5,800 रुपये प्रति क्विंटल और कानपुर में 5,750 से बढ़कर 5,850 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

  • मुंबई व रायपुर: रायपुर में भाव 5,300 से बढ़कर 5,500 रुपये और मुंबई में 5,250 से बढ़कर 5,300 रुपये प्रति क्विंटल पहुंचे।

  • अन्य प्रमुख केंद्र: रांची और कोलकाता में 5,500 रुपये, गुवाहाटी में 5,550 रुपये, हैदराबाद में 5,400 रुपये तथा चेन्नई में थोक भाव 6,000 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किए गए।

जमाखोरी पर लगाम: स्टॉक लिमिट घटी, 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने के निर्देश

बाजार में उपलब्धता बनाए रखने और कृत्रिम किल्लत रोकने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं:

  • स्टॉक लिमिट में 50% की कटौती: शुगर डीलर्स के लिए स्टॉक रखने की अधिकतम सीमा को 4,000 क्विंटल से घटाकर 2,000 क्विंटल कर दिया गया है। यह पाबंदी 15 सितंबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी।

  • गन्ना पेराई सत्र का समय निर्धारण: सरकार ने चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने के निर्देश दिए हैं, ताकि समय पर नई आवक बाजार में पहुंचकर कीमतों को स्थिर कर सके।