वॉशिंगटन| थाई अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अमेरिका का शक्तिशाली विमानवाहक युद्धपोत 'यूएसएस अब्राहम लिंकन' पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अपनी कठिन और लंबी तैनाती के बाद कुछ दिनों के लिए थाईलैंड में विश्राम करेगा। यह युद्धपोत ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियानों में सक्रिय रूप से सहायता कर रहा था। इस दौरान इस पोत ने समुद्र में लगातार 250 दिनों से भी अधिक समय बिताया, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। हालांकि, क्रू (चालक दल) के सदस्यों की मानसिक सेहत बिगड़ने, खाने-पीने की वस्तुओं तथा साफ-सफाई के सामान की कमी जैसी खबरों के सामने आने के बाद इस लंबी तैनाती को लेकर सुरक्षा और मानवाधिकार संबंधी चिंताएं काफी बढ़ गई थीं।

थाईलैंड के रक्षा मंत्रालय का आधिकारिक बयान

थाई रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता सुरसंत कोंगसिरी ने मीडिया को बताया कि 'लिंकन' युद्धपोत अपने अमेरिकी नौसैनिक बेस पर वापस लौटने से पहले क्रू के आराम और रिकवरी (स्वास्थ्य लाभ) के लिए थाईलैंड में प्रवास करेगा। बैंकॉक में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने स्पष्ट किया कि थाईलैंड में यह ठहराव नाविकों और सैनिकों को जमीन पर उतरकर मानसिक व शारीरिक रूप से तरोताजा होने का अवसर देगा। रॉयल थाई नेवी ने मंगलवार को यह भी घोषणा की थी कि अमेरिकी नौसेना के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के तीन प्रमुख जहाज पूर्वी थाईलैंड के तटों पर रुकेंगे, और इस यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार का सैन्य अभ्यास नहीं किया जाएगा।

लंबी तैनाती का सैनिकों पर प्रभाव और भू-राजनीतिक स्थिति

युद्धपोत की इस अत्यधिक लंबी तैनाती का लंबे समय तक घरों से दूर रहने वाले नौसैनिकों पर गहरा मानसिक असर पड़ता है, साथ ही जहाज और उसके तकनीकी उपकरणों पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है। हालांकि हाल के हफ्तों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन अमेरिकी नौसेना अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नाकेबंदी को सख्ती से लागू कर रही है। दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह इस भू-राजनीतिक संघर्ष को समाप्त करने की क्या रूपरेखा तैयार कर रहा है।

अमेरिकी नौसेना के अधिकारी का बयान

युद्धपोत की व्यवस्थाओं पर बात करते हुए अमेरिकी नौसेना के एडमिरल डेरिल कॉडल ने स्वीकार किया कि मुख्य समस्या पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन या सब्जियों की उपलब्धता की नहीं थी, बल्कि साफ-सफाई के आवश्यक सामान, एनर्जी ड्रिंक्स और सोडा जैसी चीजों की आपूर्ति में आई बाधाओं की थी, जिनकी उम्मीद नाविक ऐसी लंबी समुद्री यात्राओं के दौरान करते हैं। उन्होंने कहा कि स्पेयर्स पार्ट्स, भोजन और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की सप्लाई चेन पूरी तरह अलग होती है, जिन्हें समय पर व्यवस्थित करना एक चुनौती था। उन्होंने इसे हमारी आपूर्ति प्रक्रिया के लिए एक 'सीखने का दौर' करार दिया।

इस पूरे घटनाक्रम पर बैंकॉक स्थित अमेरिकी दूतावास और अमेरिकी नौसेना की ओर से फिलहाल कोई अतिरिक्त आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।