वाशिंगटन| पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े टकराव के थमने के दूर-दूर तक कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इस बीच, व्हाइट हाउस की ओर से बेहद कड़े संकेत दिए गए हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ नए और बड़े सैन्य हमलों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। अमेरिका की मुख्य मांग है कि ईरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को तुरंत दोबारा खोले और पिछले महीने दोनों देशों के बीच तय हुए संघर्षविराम समझौते की शर्तों का सख्ती से पालन करे। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ईरान ने इस समझौते का उल्लंघन कर इसे जल्द ही तोड़ दिया।

कुवैत में ड्रोन हमला नाकाम, ईरान समर्थित रिवोल्यूशनरी गार्ड का दावा

शुक्रवार की रात अमेरिका की ओर से ईरान पर कोई प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई तो नहीं की गई, लेकिन दूसरी ओर ईरान के अर्धसैनिक संगठन 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो और तेल टैंकरों को अपना निशाना बनाया है। वहीं, खाड़ी देश कुवैत ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है कि उसने देश की सुरक्षा पर मंडरा रहे एक बड़े ईरानी ड्रोन हमले को पूरी तरह नाकाम कर दिया है।

व्हाइट हाउस की दोटूक— 'ईरान को चुकानी होगी इस नासमझी की कीमत'

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने एक तीखा बयान जारी करते हुए कहा कि ईरान ने पिछले महीने अमेरिका के साथ युद्धविराम को लेकर एक लिखित समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन उसने अपनी फितरत के मुताबिक बहुत जल्द उस समझौते को तोड़ डाला। उन्होंने ईरान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों पर कायराना हमले किए हैं और अमेरिकी सैनिकों की जान ली है। लेविट ने शुक्रवार शाम जारी अपने बयान में स्पष्ट शब्दों में कहा, "राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस तरह के आतंकवादी और आक्रामक व्यवहार को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। जब तक ईरान राष्ट्रपति ट्रंप की मंशा के अनुरूप सार्थक और गंभीर तरीके से बातचीत की मेज पर नहीं आता, तब तक उसे इसकी भारी कीमत चुकानी ही होगी।"

इससे पहले शुक्रवार को मेरीलैंड स्थित कैंप डेविड में अपने कैबिनेट मंत्रियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने दो टूक अंदाज में कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपना सैन्य और सामरिक अभियान पूरी ताकत से जारी रखेगा। उन्होंने कहा, "हम इस संघर्ष में केवल और केवल जीतना चाहते हैं।" ट्रंप ने आगे चेतावनी देते हुए कहा, "हम उन पर बहुत कड़ा और निर्णायक प्रहार करेंगे। वह वक्त दूर नहीं जब वे खुद यह स्वीकार करेंगे कि अब वे इस भारी दबाव को और अधिक बर्दाश्त नहीं कर सकते।"

डोनाल्ड ट्रंप बोले— 'अब ईरान पर से मेरा भरोसा पूरी तरह उठता जा रहा है'

कैंप डेविड की कैबिनेट बैठक के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि ईरान पर से उनका भरोसा लगातार कम होता जा रहा है। उन्होंने तेहरान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत का चैनल खुला हुआ है, तब भी ईरानी पक्ष लगातार अपने वादों से मुकर रहा है। ट्रंप ने कहा, "वे लगातार झूठ बोलते हैं और दुनिया के सामने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं। वे हर वक्त दुनिया को यह दिखाते हैं कि वे बातचीत करना चाहते हैं, लेकिन असलियत में बार-बार अपने समझौतों को तोड़ देते हैं।"

इन तमाम तीखी टिप्पणियों के बावजूद ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका और ईरान के बीच अभी भी विभिन्न उच्च स्तरों पर कूटनीतिक बातचीत का दौर जारी है। उन्होंने बताया कि इस अमेरिकी वार्ता टीम में राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टेव विटकॉफ, वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रूबियो जैसे शीर्ष अधिकारी मुख्य सदस्य के रूप में शामिल हैं। उन्होंने भरोसा जताते हुए कहा, "हमारे पास देश के सबसे बेहतरीन लोग हैं जो इस संवाद को संभाल रहे हैं।"

क्या अमेरिका ईरान पर दोबारा करेगा सैन्य हमला?

क्षेत्रीय सुरक्षा और मध्य-पूर्व के हालातों का जिक्र करते हुए ट्रंप ने खुलासा किया कि जिस दौरान दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही थी, ठीक उसी समय जॉर्डन में स्थित एक अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाकर हमला किया गया। उन्होंने घटना का जिक्र करते हुए कहा, "मुझे रक्षा मामलों से जुड़े अधिकारियों का फोन आया कि उन्होंने जॉर्डन स्थित हमारे एक सैन्य अड्डे पर पांच खतरनाक मिसाइलें दाग दी हैं।"

भविष्य में अमेरिका द्वारा और अधिक सैन्य हमले किए जाने की आशंका के सवाल पर राष्ट्रपति ट्रंप ने सतर्कता बरतते हुए कहा, "अगर मैं यह कह दूं कि भविष्य में ऐसा बिल्कुल नहीं होगा, तो यह मेरी सबसे बड़ी मूर्खता होगी। इस तरह के नाजुक हालातों में आपको हमेशा पूरी तरह सतर्क और तैयार रहना पड़ता है।"

ईरान की दीर्घकालिक सैन्य और आर्थिक क्षमता पर अपनी बात रखते हुए ट्रंप ने कहा, "वे आने वाले समय में और अधिक कमजोर होते चले जाएंगे। अभी भले ही वे कागजों पर या सतह पर थोड़े मजबूत नजर आ रहे हों, लेकिन जल्द ही वे पूरी तरह पस्त हो जाएंगे और आखिरकार उनकी पूरी ताकत समाप्त हो जाएगी।" अमेरिकी राष्ट्रपति का यह सख्त बयान ऐसे समय में सामने आया है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम और व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े पुराने मुद्दों को लेकर तनाव अपनी पराकाष्ठा पर है।