इस शिव मंदिर में बेलपत्र नहीं, चढ़ाई जाती है चने की दाल! मान्यता है कि दूर हो जाता है कर्ज, जानिए अनोखी परंपरा
मध्य प्रदेश की तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर अपने धार्मिक महत्व और आस्था के लिए देशभर में जानी जाती है, लेकिन यहां स्थित ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर एक ऐसी अनोखी परंपरा के कारण खास पहचान रखता है, जो इसे बाकी मंदिरों से अलग बनाती है. इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ को जल, दूध या बेलपत्र के साथ नहीं, बल्कि चने की दाल अर्पित की जाती है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से दाल चढ़ाने पर व्यक्ति को कर्ज से मुक्ति मिलती है.जीवन में आर्थिक सुख-समृद्धि आती है.
नर्मदा तट पर बसे इस प्राचीन मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. खासतौर पर सोमवार, शिवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं. लोग पहले मां नर्मदा में स्नान करते हैं, फिर ऋणमुक्तेश्वर महादेव के दरबार में पहुंचकर चने की दाल अर्पित कर अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हैं.
ऋणमुक्तेश्वर महादेव की स्थापना करवाई
मंदिर के पुजारी सुकाजी नायक बताते हैं कि इस मंदिर का इतिहास पांडव काल से जुड़ा हुआ है. अज्ञातवास के दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को ऋण से मुक्ति दिलाने के लिए ऋणमुक्तेश्वर महादेव की स्थापना करवाई थी. जब अज्ञातवास समाप्त हुआ है. यहां आकर भगवान का आभार व्यक्त किया. सवाया सोना अर्पित किया. उसी परंपरा के प्रतीक के रूप में आज चने की दाल चढ़ाई जाती है. यह परंपरा अनादिकाल से चली आ रही है. उनके पूर्वज भी पीढ़ियों से इस मंदिर में पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं. राजा नत्थू भील के समय से उनका परिवार यहां सेवा दे रहा है. आज भी पूरी विधि-विधान के साथ पूजा कराई जाती है.
भगवान को चढ़ती है चने की दाल
श्रद्धालुओं की मानें तो यहां आने से उन्हें मानसिक शांति के साथ-साथ आर्थिक समस्याओं से भी राहत मिलती है. भक्त लव जोशी बताते हैं कि जब भी हम ओंकारेश्वर आते हैं. सबसे पहले नर्मदा में स्नान करते हैं और फिर यहां आकर चने की दाल अर्पित करते हैं.वहीं जीतेंद्र कुमरावत का कहना है कि यहां की आस्था अलग ही है, हर बार दर्शन करने के बाद एक अलग सुकून मिलता है.ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर की यही खासियत इसे भक्तों के बीच विशेष बनाती है. जहां एक ओर पारंपरिक पूजा-पद्धति से अलग यह अनूठी परंपरा देखने को मिलती है, वहीं दूसरी ओर लोगों का अटूट विश्वास इसे आस्था का बड़ा केंद्र बनाता है. यह मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण है जो आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं.


भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना बनी आर्थिक संबल
बाल श्रम पर जीरो टॉलरेंस, हर मुक्त बच्चे के पुनर्वास पर होगा विशेष फोकस
महिला एशियन चैंपियनशिप की तैयारियों को लेकर मंत्री सारंग नाथुबरखेड़ा अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स का किया निरीक्षण
समान नागरिक संहिता को व्यापक जनसमर्थन
माँ चन्द्रहासिनी आरोग्य धाम बनेगा जनसेवा का नया केंद्र : वित्त मंत्री ओपी चौधरी
धमतरी जिले में 200 एकड़ से बढ़ाकर 600 एकड़ तक औषधीय खेती के विस्तार का लक्ष्य
मध्यप्रदेश पुलिस की साइबर अपराधियों पर लगातार कार्रवाई
इंदौर और विकास हैं एक दूसरे के पर्याय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
कृषि में छत्तीसगढ़ का नया अध्याय बनाया धमतरी जिले ने
इरादों की स्याही से किशन जंगम ने लिखी सफलता की नई इबारत