उज्जैन में डॉग बाइट बना बड़ा संकट, हर महीने 2 हजार से ज्यादा लोग घायल
उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि हर महीने करीब 2 हजार लोग डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैं। यह समस्या अब स्थानीय निवासियों के साथ-साथ महाकाल मंदिर आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए भी बड़ा खतरा बन चुकी है। शहर में लगातार हो रही इन घटनाओं ने न केवल लोगों में डर पैदा कर दिया है, बल्कि स्थानीय स्वास्थ्य सुविधाओं और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्वास्थ्य केंद्रों पर बढ़ता मरीजों का भार
जिले में डॉग बाइट के बढ़ते मामलों के कारण चरक अस्पताल में भारी भीड़ देखी जा रही है। अस्पताल में पर्याप्त एंटी-रेबीज वैक्सीन होने के बावजूद, सीमित स्टाफ के कारण मरीजों को उपचार के लिए लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ती है। यहाँ केवल तीन नर्सें ही इंजेक्शन लगाने का काम संभाल रही हैं, जिससे इलाज की प्रक्रिया काफी धीमी हो गई है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि वैक्सीन की कोई कमी नहीं है, लेकिन बढ़ती मरीजों की संख्या ने व्यवस्थाओं को चरमरा दिया है।
महाकाल मंदिर परिसर और आवासीय क्षेत्रों में दहशत
महाकाल मंदिर और 'महाकाल लोक' जैसे अति संवेदनशील क्षेत्रों में भी आवारा कुत्तों की मौजूदगी श्रद्धालुओं के लिए मुसीबत का सबब बनी हुई है। मंदिर परिसर में सफाई कर्मी पर हमले से लेकर महिदपुर में 40 लोगों को एक साथ काटने जैसी घटनाओं ने पूरे जिले को हिलाकर रख दिया है। हाल ही में एक महिला का स्कूटी से गिरना इस बात का प्रमाण है कि ये कुत्ते अब राहगीरों के लिए भी बड़ा खतरा बन चुके हैं। देलवाड़ी गांव में एक मासूम बच्चे पर हुआ हमला शासन और प्रशासन की निष्क्रियता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
प्रभावी नियंत्रण और स्थायी समाधान का अभाव
शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए चलाए जा रहे नसबंदी अभियान पूरी तरह से निष्प्रभावी साबित हो रहे हैं। स्थिति यह है कि नगर निगम का डॉग शेल्टर लंबे समय से खाली पड़ा है और इस दिशा में कोई भी सक्रिय एजेंसी काम नहीं कर रही है। स्थानीय लोगों की निरंतर मांग के बावजूद, आवारा कुत्तों को पकड़ने और उनके प्रबंधन के लिए कोई ठोस कार्ययोजना धरातल पर नहीं दिख रही है। प्रशासन का केवल उपचार उपलब्ध कराने का तर्क समस्या का स्थायी हल नहीं है, जिसके लिए तत्काल प्रभाव से कड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।


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