स्किनकेयर में 'ज्यादा' हमेशा बेहतर नहीं, जानिए ओवर स्किनकेयर के साइड इफेक्ट्स
आज के समय में महिलाएं अपनी त्वचा की खूबसूरती और सेहत को लेकर काफी सतर्क हो चुकी हैं। सुबह उठकर चेहरे की सफाई (क्लींजिंग) करना, दिनभर त्वचा की नमी बनाए रखना (मॉइश्चराइजिंग) और रात को सोते समय स्किन को रिपेयर करने वाले प्रोडक्ट्स लगाना अब उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। लेकिन कई बार त्वचा को खूबसूरत बनाने की इस होड़ में जरूरत से ज्यादा प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल होने लगता है। डर्मेटोलॉजिस्ट (त्वचा विशेषज्ञ) इसे ‘ओवर-स्किनकेयर’ का नाम देते हैं, जो त्वचा को फायदा पहुंचाने के बजाय गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
क्या है यह सिंड्रोम और कैसे पहुंचाता है नुकसान?
इस सिंड्रोम के तहत महिलाएं अपनी त्वचा को लेकर इतनी ज्यादा फिक्रमंद हो जाती हैं कि वे अपनी स्किन के टाइप (प्रकृति) को समझे बिना ही बाजार में चल रहे ट्रेंडी और महंगे प्रोडक्ट्स का अंधाधुंध इस्तेमाल शुरू कर देती हैं। चेहरे को बार-बार रगड़ना (स्क्रब करना) और डेड स्किन हटाने के चक्कर में अत्यधिक एक्सफोलिएशन करने से त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षात्मक परत बेहद कमजोर हो जाती है। इसका नतीजा चेहरे पर तेज जलन, लालिमा (रेडनेस), खुजली, छोटे-छोटे दाने या अचानक से कील-मुंहासे (ब्रेकआउट्स) के रूप में सामने आता है।
सोशल मीडिया के भ्रामक वीडियो भी बन रहे हैं बड़ी वजह
इंटरनेट और सोशल मीडिया पर रातों-रात गोरापन या 'इंस्टेंट ग्लो' का दावा करने वाले रील्स और वीडियो आपको नए-नए सीरम, टोनर और क्रीम आज़माने के लिए उकसाते हैं। दूसरों की तरह बेदाग और चमकती त्वचा पाने की इस हड़बड़ी में आप अनजाने में अपनी त्वचा के नेचुरल बैरियर (सुरक्षा कवच) को हमेशा के लिए क्षतिग्रस्त कर बैठती हैं।
गलत तकनीकों और सीरम का कॉम्बिनेशन है खतरनाक
ट्रेटिनॉइन, विटामिन सी, और ग्लाइकोलिक एसिड जैसे ताकतवर केमिकल इंग्रीडिएंट्स त्वचा के लिए वैसे तो फायदेमंद होते हैं, लेकिन इन्हें बिना सोचे-समझे एक साथ और रोज-रोज लगाना त्वचा को झुलसा सकता है। इसके अलावा, दिन में कई बार चेहरा धोना, बहुत टाइट हाथों से स्क्रब करना या बार-बार केमिकल पील और फेस मास्क का उपयोग करने से त्वचा का प्राकृतिक तेल (सीबम) पूरी तरह खत्म हो जाता है। परिणाम यह होता है कि स्किन की ऊपरी परत बेजान, रूखी और अत्यधिक संवेदनशील (सेंसिटिव) हो जाती है।
स्किन टाइप को पहचाने बिना प्रोडक्ट्स चुनना बड़ी भूल
हर व्यक्ति की त्वचा की जरूरतें अलग होती हैं। यही कारण है कि ऑयली, ड्राय और सेंसिटिव स्किन के लिए बिल्कुल अलग-अलग उत्पाद तैयार किए जाते हैं। सही जानकारी के अभाव में गलत प्रोडक्ट्स का लेप लगाने से चेहरे पर पिंपल्स और रूखापन तेजी से बढ़ जाता है। बेहतर परिणामों के लिए सबसे पहले अपनी त्वचा की प्रकृति को पहचानें। जब आप अपनी स्किन की जरूरत के हिसाब से सही चीजों का चुनाव करेंगी, तभी आपकी त्वचा स्वस्थ और संतुलित नजर आएगी।
सरल और बेसिक रूटीन ही है सबसे बेस्ट
ठीक वैसे ही जैसे घर में जरूरत से ज्यादा सामान भर लेने से कबाड़ और अव्यवस्था फैल जाती है, चेहरे पर भी एक साथ ढेर सारे प्रोडक्ट्स थोपने से स्किन का संतुलन बिगड़ जाता है। इसलिए कम मगर सही और प्राकृतिक प्रोडक्ट्स को ही अपनी दिनचर्या में जगह दें।
सैंडविच मेथड से पाएं राहत और बेहतरीन ग्लो
नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में त्वचा विज्ञान विभाग की जूनियर रेजिडेंट डॉ. सम्पूर्णा दास बताती हैं कि यदि आपको लगता है कि आप भी इस सिंड्रोम की गिरफ्त में आ रही हैं, तो तुरंत अपने स्किन केयर रूटीन को बिल्कुल सादा और सरल बना लें। ऐसे में 'सैंडविच मेथड' (पहले मॉइश्चराइजर की परत, फिर रेटिनॉइड और उसके ऊपर दोबारा मॉइश्चराइजर) आजमाना बेहद असरदार साबित हो सकता है। यह अनोखा तरीका रेटिनॉइड के असर को कम किए बिना त्वचा में होने वाली जलन और लालिमा को रोकता है, क्योंकि मॉइश्चराइजर त्वचा के ऊपर एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार कर देता है। इसके साथ ही, चेहरे पर कोई भी नया प्रोडक्ट लगाने से पहले कान के पीछे या हाथ पर पैच टेस्ट जरूर करें। याद रखें, संतुलित और सीमित देखभाल ही स्वस्थ व चमकदार त्वचा का असली राज है।


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