बीजेपी नेता समेत 3 की जिंदा जलाकर हत्या, अब CBI करेगी पूरे मामले की जांच
सरगुजा| छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोरिया मर्डर केस में एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य सरकार ने इस संवेदनशील मामले की गुत्थी सुलझाने का जिम्मा अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया है। गौरतलब है कि बीते 16 जून की खौफनाक रात को नौगई गांव में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस खूनी वारदात में जान गंवाने वाले लोगों की पहचान भरत सिंह, नागेंद्र सिंह और वीरेंद्र सिंह के तौर पर हुई थी। मृतकों में शामिल भरत सिंह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व जनपद पंचायत अध्यक्ष भी थे, जिसके कारण यह मामला बेहद हाई-प्रोफाइल हो गया था।
परिजनों के लगातार दबाव के बाद लिया गया फैसला
इस दिल दहला देने वाली वारदात के बाद से ही पीड़ित परिवार और उनके सगे-संबंधी लगातार मामले की निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी (CBI) से तफ्तीश कराने की मांग पर अड़े हुए थे। हालांकि स्थानीय पुलिस इस मामले की विवेचना में जुटी हुई थी, लेकिन पीड़ित परिवार का आरोप था कि पुलिस प्रशासन की जांच सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रही है और उन्हें स्थानीय स्तर पर न्याय मिलने की उम्मीद बेहद कम दिखाई दे रही है। अपनी मांग को लेकर शोकाकुल परिवार कई बार सरकार के मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष गुहार लगा चुका था।
उपमुख्यमंत्री ने फोन पर दिया भरोसा, अब इंसाफ की आस
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने खुद पीड़ित परिवार से फोन पर लंबी बातचीत की और उन्हें ढांढस बंधाते हुए निष्पक्ष न्याय का पूरा भरोसा दिया। इस बातचीत के तुरंत बाद ही सरकार ने इस हाई-प्रोफाइल केस की फाइल सीबीआई के सुपुर्द करने के प्रस्ताव पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी। शासन के इस बड़े फैसले के बाद अब बहुत जल्द सीबीआई की एक विशेष टीम नागोई गांव पहुंचकर घटनास्थल का मुआयना करेगी और नए सिरे से साक्ष्य जुटाकर जांच शुरू करेगी। इस आदेश के बाद पीड़ित परिवार को अब दोषियों को कड़ी सजा मिलने की उम्मीद जगी है।
क्या था इस खूनी रंजिश का पूरा मामला?
शुरुआती जानकारी के अनुसार, नागोई क्षेत्र में रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन को लेकर दो पक्षों में लंबे समय से भारी तनातनी चल रही थी। मृतक भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह और आरोपी मनोज त्रिपाठी के बीच इस वर्चस्व की लड़ाई को लेकर पहले भी कई बार विवाद हो चुका था, जिसकी लिखित शिकायत थाने में भी दर्ज कराई गई थी। घटना वाली रात आरोपी मनोज त्रिपाठी ने अपने कुछ गुर्गों के साथ मिलकर भरत सिंह की फॉर्च्यूनर गाड़ी को बीच रास्ते में जबरन रोक लिया। इसके बाद आरोपियों ने वाहन पर हमला कर उसे आग के हवाले कर दिया, जिसमें झुलसने और हमले के कारण भरत सिंह समेत तीन लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी।



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