चुपचाप बढ़ती कीमतों ने बिगाड़ा बजट, महंगे हुए ये जरूरी सामान
नई दिल्ली। देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद आम जनता की जेब पर पहले ही बड़ा बोझ पड़ रहा था। इस चौतरफा मार के बीच, बीते मात्र दो हफ्तों के भीतर रोजमर्रा की कई अन्य आवश्यक वस्तुओं के दामों में भी गुपचुप तरीके से बढ़ोतरी कर दी गई है, जिससे अधिकांश उपभोक्ता अभी तक अनजान हैं। निर्माण लागत और मालभाड़ा बढ़ने की वजह से एफएमसीजी (FMCG) क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों जैसे एचयूएल, डाबर, मैरिको और कोलगेट ने अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ा दी हैं। इसके चलते प्रीमियम श्रेणी के साबुन 4 से 5 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं, जबकि कपड़ों की धुलाई में इस्तेमाल होने वाले डिटर्जेंट के दामों में 5 से 11 प्रतिशत तक का उछाल आया है। इसके साथ ही टूथपेस्ट और ओरल केयर से जुड़े उत्पादों की कीमतें बढ़ने से सुबह की शुरुआत भी महंगी हो गई है।
दूध और डेयरी उत्पादों पर बढ़ी महंगाई
आम जनता के सुबह के बजट को प्रभावित करते हुए प्रमुख डेयरी ब्रांड्स ने दूध की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि की है। अमूल गोल्ड का एक लीटर का पैकेट अब 68 रुपये के बजाय 70 रुपये में मिल रहा है, जबकि अमूल ताजा की कीमत भी 55 रुपये से बढ़कर 57 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इसी तरह, मदर डेयरी ने भी अपने फुल क्रीम दूध के दाम 69 रुपये से बढ़ाकर 72 रुपये प्रति लीटर कर दिए हैं। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी भैंस के दूध (बफेलो मिल्क) पर की गई है, जिसकी कीमत में सीधे 5 रुपये का इजाफा कर इसे 75 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
रसोई का बजट और सब्जियों के दाम बेकाबू
थोक परिवहन और मालभाड़े में हुई बढ़ोतरी के कारण खुदरा बाजारों में खुली दालों और चावल की कीमतों में प्रति किलोग्राम 5 से 7 रुपये तक की तेजी देखी जा रही है। खाद्य तेलों की बात करें तो सफोला ब्रांड के तेलों में 6 से 11 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा हरी सब्जियों के दाम भी आसमान छू रहे हैं। मात्र 15 दिनों के भीतर टमाटर की कीमतें 30-40 रुपये से बढ़कर 60-70 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई हैं। परिवहन लागत बढ़ने से आलू, प्याज, अदरक, नींबू, हरी मिर्च, बैंगन और भिंडी जैसी बुनियादी सब्जियों के भाव भी 5 से 10 रुपये प्रति किलो तक चढ़ गए हैं।
होटल और रेस्टोरेंट में भोजन हुआ महंगा
व्यावसायिक (कमर्शियल) एलपीजी सिलेंडरों की दरों में हुई वृद्धि का सीधा असर अब बाहर खाना खाने वाले शौकीनों पर पड़ रहा है। रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों ने अपनी इनपुट लागत की भरपाई करने के लिए खाद्य पदार्थों की दरों में बढ़ोतरी कर दी है, जिससे इस क्षेत्र की महंगाई दर 5.75 प्रतिशत के स्तर को छू गई है। लागत के बढ़ते दबाव को देखते हुए पिछले एक महीने के दौरान होटल मालिकों ने अपने फूड मेन्यू कार्ड की कीमतों में करीब 1.8 प्रतिशत तक का इजाफा कर दिया है, जिससे अब बाहर जाकर भोजन करना भी आम आदमी की पहुंच से दूर होता जा रहा है।


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