विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का धार्मिक कार्ड, ‘बटुक पूजा’ से साधेगी ब्राह्मण समाज
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर ब्राह्मण विमर्श गरमा गया है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की तर्ज पर अब नवगठित कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने भी 'बटुक पूजा' का आयोजन किया है। समाजवादी पार्टी से बगावत कर भाजपा का दामन थामने वाले पांडेय की इस सियासी चाल को ब्राह्मण वोटरों को भाजपा के पक्ष में लामबंद करने की अहम कोशिश माना जा रहा है। सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या मंत्री बनने के तुरंत बाद उन्होंने यह आयोजन ब्राह्मण समाज की कथित नाराजगी दूर करने के लिए किया है, या फिर वह सत्ता और संगठन में खुद को एक बड़े ब्राह्मण चेहरे के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।
पिछले कुछ समय से यह सुगबुगाहट लगातार उठ रही थी कि सूबे का ब्राह्मण तबका सत्ताधारी पार्टी से खफा है। पार्टी के ही कई विधायकों के बयानों ने भी इस आग में घी डालने का काम किया था। इस बीच, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों की राजनीतिक गतिविधियों ने ब्राह्मण नेताओं को अपनी अहमियत साबित करने का मौका दे दिया है। वहीं, भाजपा भी यह साफ संदेश देने की जुगत में है कि उसकी सरकार में ब्राह्मणों की अनदेखी के आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है।
यह स्पष्ट है कि इस बटुक पूजा का मकसद महज अपनी राजनीतिक हैसियत और प्रासंगिकता बढ़ाना नहीं है, बल्कि ब्राह्मण समाज के बीच अपनी गहरी पैठ का संदेश देना भी है। ब्रजेश पाठक और मनोज पांडेय की यह रणनीति आगामी चुनावों में भाजपा के लिए कितनी फायदेमंद साबित होगी, यह तो चुनाव के नतीजे ही बताएंगे। लेकिन इतना तय है कि इस धार्मिक अनुष्ठान ने प्रदेश की राजनीति में 'ब्राह्मण कार्ड' को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
चुनावी राजनीति की धुरी रहा है ब्राह्मण समाज
यूपी की कुल आबादी में करीब 12 से 15 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाला ब्राह्मण वर्ग हमेशा से सियासत का अहम मुद्दा रहा है। हाल ही में यूजीसी के कुछ नियमों, फिल्मों में पंडितों के चित्रण, एनसीईआरटी, यूपी पुलिस भर्ती और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की परीक्षाओं में पूछे गए सवालों से जुड़े विवादों ने इस धारणा को बल दिया था कि मौजूदा सरकार में ब्राह्मणों का अपमान हो रहा है। इन चर्चाओं ने कहीं न कहीं भाजपा आलाकमान की चिंताएं भी बढ़ा दी थीं।
समीकरण साधना नहीं है आसान
हिंदुत्व के एजेंडे पर आगे बढ़ने वाली भारतीय जनता पार्टी यह कतई नहीं चाहेगी कि उसका यह पारंपरिक वोटर उससे दूर जाए। हालांकि, विपक्षी दलों पर अति-पिछड़ों और दलितों की अनदेखी का आरोप लगाकर इन वर्गों को साधने वाली भाजपा के लिए सीधे तौर पर केवल ब्राह्मणों की राजनीति करना एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में पार्टी ब्रजेश पाठक और मनोज पांडेय जैसे कद्दावर चेहरों को आगे कर 'बटुक पूजा' जैसे आयोजनों के जरिए इस सामाजिक समीकरण को दुरुस्त करने की रणनीति पर काम कर रही है।


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