सीमा सुरक्षा को मजबूती: सेना के बेड़े में शामिल होंगी 300 से ज्यादा के-9 वज्र
नई दिल्ली। भारतीय थल सेना चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर अपनी ताकत बढ़ाने के लिए एक बेहद बड़ा कदम उठाने जा रही है। दोहरी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सेना अब 300 से अधिक आधुनिक 'के-9 वज्र सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर' (K-9 Vajra Self-Propelled Howitzer) तोपों को खरीदने की तैयारी में है। भारतीय सैन्य इतिहास के इस सबसे बड़े तोपखाना (Artillery) सौदे की अनुमानित लागत लगभग 23,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
'मेक इन इंडिया' के तहत एलएंडटी करेगी निर्माण
रक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस बड़े प्रस्ताव को जल्द ही मंजूरी के लिए रक्षा खरीद बोर्ड (DPB) के सामने रखा जाएगा। हरी झंडी मिलने के बाद इन अत्याधुनिक तोपों का निर्माण भारतीय दिग्गज कंपनी 'लार्सन एंड टुब्रो' (L&T) द्वारा दक्षिण कोरिया की कंपनी 'हनव्हा एयरोस्पेस' की तकनीकी मदद से भारत में ही किया जाएगा। इससे पहले सेना ने साल 2017 में ₹4,500 करोड़ की लागत से 100 तोपों का पहला ऑर्डर दिया था, जिसकी डिलीवरी 2021 तक पूरी हो चुकी है। इसके बाद दिसंबर 2023 में ₹7,600 करोड़ का दूसरा ऑर्डर दिया गया। अब 300 नई तोपें आने के बाद भारतीय सेना के बेड़े में के-9 वज्र तोपों की कुल संख्या 500 के पार पहुंच जाएगी।
40 किलोमीटर दूर तक सटीक प्रहार और बर्फीले पहाड़ों में भी सफल
155 मिमी/52 कैलिबर वाली यह शक्तिशाली के-9 वज्र तोप 40 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर बैठे दुश्मन को पूरी सटीकता से नेस्तनाबूद करने की ताकत रखती है। शुरुआती दिनों में इसे रेगिस्तानी इलाकों और मैदानों के हिसाब से तैयार माना गया था, लेकिन पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ उपजे तनाव के बाद इसके विंटर-वर्जन (कड़कड़ाती ठंड के अनुकूल) का ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में परीक्षण किया गया। शून्य से भी नीचे के तापमान और कठिन पहाड़ी रास्तों पर इसके बेहतरीन प्रदर्शन को देखकर भारतीय सेना का इस तोप पर भरोसा और ज्यादा बढ़ गया है।
'शूट-एंड-स्कूट' यानी गोला दागकर तुरंत जगह बदलने की खूबी
इस आधुनिक तोप की सबसे बड़ी खासियत इसकी 'शूट-एंड-स्कूट' तकनीक है। इसका मतलब है कि यह तोप दुश्मन पर अंधाधुंध गोले बरसाने के तुरंत बाद अपनी लोकेशन (जगह) बदल सकती है, जिससे दुश्मन चाहकर भी इस पर जवाबी हमला नहीं कर पाता। पूरी तरह बख्तरबंद (Armored) सुरक्षा कवच से ढकी होने के कारण यह तोप के अंदर मौजूद भारतीय जांबाजों को भी सुरक्षित रखती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस महा-सौदे से भारतीय सेना की फायरपावर (मारक क्षमता) कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे चीन और पाकिस्तान दोनों ही मोर्चों पर भारत की पकड़ और मजबूत होगी।


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