कांग्रेस की गैरमौजूदगी, यूथ कांग्रेस ने RSS ड्रेस पहनकर खोला मोर्चा
भोपाल: राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सियासी ड्रामा लगातार जारी है। इस फैसले के विरोध में बुधवार को भोपाल में होने वाला कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन ऐन वक्त पर रद्द कर दिया गया। पार्टी ने पहले ऐलान किया था कि सुबह 11 बजे उनके बड़े नेता चुनाव आयोग पहुंचकर शिकायत दर्ज कराएंगे, लेकिन तय समय पर कांग्रेस का कोई भी बड़ा चेहरा वहां नहीं पहुंचा।
यूथ कांग्रेस का अनूठा विरोध और आरएसएस पर आरोप
भले ही कांग्रेस के बड़े नेता तय समय पर चुनाव आयोग के दफ्तर नहीं पहुंचे, लेकिन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता भारी संख्या में वहां पहुंच गए और उन्होंने जमकर नारेबाजी की। इस दौरान कार्यकर्ता अपने साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ड्रेस भी लेकर आए थे। युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं का सीधा आरोप था कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन स्वतंत्र रूप से नहीं, बल्कि आरएसएस के इशारे और दबाव में रद्द कराया गया है।
क्यों अचानक बदला गया भोपाल का कार्यक्रम
भोपाल में होने वाले इस बड़े प्रदर्शन और शिकायत कार्यक्रम को अचानक रद्द करने के पीछे कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली के घटनाक्रम का हवाला दिया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में दोपहर 12 बजे चुनाव आयोग के केंद्रीय कार्यालय से मुलाकात का समय तय हो गया था, जिसके चलते भोपाल के कार्यक्रम को रोक दिया गया। भोपाल में निर्वाचन आयोग जाने के बजाय रोशनपुरा चौराहे पर कांग्रेस नेताओं के उपवास कार्यक्रम की तैयारियां शुरू कर दी गईं।
घोषणा और जमीनी हकीकत में दिखा तालमेल का अभाव
इस पूरे घटनाक्रम के बाद कांग्रेस की अंदरूनी रणनीति और सीनियर नेताओं के बीच आपसी तालमेल पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। मंगलवार शाम को कांग्रेस ने बकायदा आधिकारिक बयान जारी कर कहा था कि प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सुबह 11 बजे चुनाव आयोग जाएंगे। लेकिन जमीन पर हकीकत बिल्कुल अलग दिखी। तय समय पर सिर्फ दो विधायक कुछ देर के लिए आयोग के दफ्तर के बाहर पहुंचे और कार्यक्रम रद्द होने की खबर मिलते ही वापस लौट गए।
देर रात तक दफ्तर के बाहर चला था हाई-वोल्टेज ड्रामा
इससे पहले, मंगलवार को जैसे ही मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने की खबर आई, कांग्रेसियों का गुस्सा फूट पड़ा था। कांग्रेस नेताओं ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के दफ्तर के बाहर ही डेरा डाल दिया और देर रात तक धरने पर बैठे रहे। पार्टी नेताओं ने चुनाव आयोग के इस कदम को लोकतंत्र की हत्या बताया। बाद में चुनाव अधिकारियों द्वारा इस मामले पर दोबारा उचित बातचीत करने का भरोसा दिए जाने के बाद, रात करीब 11:30 बजे इस धरने को खत्म किया गया था।


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