सीट छीनने की कोशिश का आरोप, कांग्रेस ने सरकार को घेरा
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज होने के बाद देश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। चुनाव आयोग के इस फैसले को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा है, जबकि भाजपा ने इसे कांग्रेस के अंदर की आपसी लड़ाई का नतीजा बताया है।
क्यों रद्द हुआ नामांकन पत्र
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब भाजपा नेता राहुल कोठारी ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को लेकर एक शिकायत दर्ज कराई। जांच में सामने आया कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे में साल 2022 के एक मामले की जानकारी छिपाई थी। यह मामला हैदराबाद की कोर्ट (सीजेएम) द्वारा जारी किए गए एक समन से जुड़ा था। नियमों के मुताबिक चुनावी हलफनामे में ऐसी जानकारियां देना जरूरी होता है, और इसी गलती की समीक्षा करने के बाद चुनाव आयोग ने उनका नामांकन रद्द कर दिया।
स्मृति ईरानी के पुराने मामले से तुलना
चुनाव आयोग की इस कार्रवाई पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने चुनाव आयोग के पक्षपात का आरोप लगाते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का मुद्दा उठा दिया। उन्होंने कहा कि स्मृति ईरानी के पुराने चुनावी हलफनामों में शैक्षणिक योग्यता को लेकर कई तरह की गड़बड़ियां थीं, लेकिन तब उन्हें चुनाव लड़ने की इजाजत दी गई थी, जबकि मीनाक्षी नटराजन के मामले में इतनी सख्ती दिखाई गई। वहीं तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी इस फैसले को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा बताया।
कांग्रेस ने कहा सीट छीनने की साजिश
कांग्रेस पार्टी ने इस फैसले को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक दबाव में लिया गया फैसला बताया है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और केरल के विपक्षी नेता वीडी सतीशन ने इस कार्रवाई को पूरी तरह अलोकतांत्रिक करार दिया। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि यह सब राज्यसभा में कांग्रेस की एक सीट कम करने के लिए किया जा रहा है। इस फैसले के विरोध में कांग्रेस के बड़े नेताओं जैसे जयराम रमेश और सचिन पायलट ने दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर जोरदार प्रदर्शन भी किया।
भाजपा का पलटवार और कांग्रेस की अंदरूनी कलह
विपक्ष के इन सभी तीखे आरोपों पर पलटवार करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने इन्हें पूरी तरह से झूठा और बेबुनियाद बताया है। उन्होंने दावा किया कि मीनाक्षी नटराजन के इस समन की जानकारी कांग्रेस शासित राज्य तेलंगाना से ही लीक होकर बाहर आई है, जिससे साफ होता है कि यह कांग्रेस की अपनी अंदरूनी गुटबाजी और आपसी फूट का नतीजा है। इस पूरे विवाद ने राज्यसभा चुनावों से ठीक पहले देश की राजनीति और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।


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