NDA बैठक में सरकार के प्रदर्शन पर मुहर, कार्यकाल सराहना प्रस्ताव पारित
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। वे भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा करने वाले 'निर्वाचित' (चुने हुए) प्रधानमंत्री बन गए हैं। उन्होंने इस मामले में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है।
एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड और नेहरू से तुलना
प्रधानमंत्री मोदी ने चुने हुए प्रधानमंत्री के तौर पर 4,399 दिनों का कार्यकाल पूरा करके यह नया मुकाम हासिल किया है। इस ऐतिहासिक तुलना के लिए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 1952 के बाद के कार्यकाल को आधार माना गया है। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि साल 1947 से 1952 के बीच जब नेहरू जी प्रधानमंत्री थे, तब देश में पहले आम चुनाव नहीं हुए थे और वे एक अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में काम कर रहे थे। इस तरह आम चुनावों के जरिए चुने जाने के बाद लगातार काम करने के मामले में अब पीएम मोदी सबसे आगे निकल गए हैं।
कैबिनेट में सरहाना और एनडीए के 12 साल
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में एक विशेष प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें लगातार सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर पीएम मोदी की जमकर सराहना की गई। बैठक के दौरान कैबिनेट के सभी सदस्यों ने खड़े होकर प्रधानमंत्री का भव्य अभिवादन भी किया। वहीं दूसरी ओर, इस खास मौके पर भारत मंडपम में एक बड़े संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन जैसे बड़े नेताओं ने हिस्सा लिया और एनडीए सरकार के शानदार 12 सालों के सफर पर चर्चा की।
इंदिरा गांधी और मोदी के कार्यकाल का अंतर
अगर कुल समय की बात की जाए तो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 14 साल से भी ज्यादा समय तक देश की कमान संभाली थी, लेकिन उनका यह कार्यकाल लगातार नहीं था, बल्कि बीच में उसमें अंतर आया था। यही वजह है कि पीएम मोदी बिना किसी रुकावट के देश के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री बन गए हैं। उनका यह सफर साल 2014 में उनके पहले शपथ ग्रहण समारोह से शुरू हुआ था, जिसके बाद साल 2019 में उन्हें लगातार दूसरी बार और फिर साल 2024 में ऐतिहासिक रूप से लगातार तीसरी बार देश की जनता का भारी जनादेश मिला।


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