देवराज उर्स के पोते और कांग्रेस नेता सूरज हेगड़े का 55 वर्ष की उम्र में आकस्मिक निधन
बेंगलुरु। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के सचिव और कर्नाटक सरकार की गारंटी योजना कार्यान्वयन समिति के उपाध्यक्ष सूरज हेगड़े का कल रात आकस्मिक निधन हो गया। पार्टी सूत्रों द्वारा सोमवार को दी गई जानकारी के अनुसार, वह लगभग 55 वर्ष के थे और एक निजी अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने के कारण उन्होंने अंतिम सांस ली। सूरज हेगड़े भारतीय युवा कांग्रेस के पूर्व प्रभारी होने के साथ-साथ कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री देवराज उर्स के पोते थे। उनके इस तरह अचानक चले जाने से पूरे राजनीतिक जगत और कांग्रेस पार्टी में शोक की लहर दौड़ गई है।
मुख्यमंत्री का गहरा शोक और भावुक संदेश
सूरज हेगड़े के असामयिक निधन पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गहरा दुख प्रकट किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी संवेदनाएं साझा करते हुए लिखा कि अपने प्रिय सहयोगी के अचानक चले जाने की खबर से उन्हें बहुत गहरा सदमा लगा है। मुख्यमंत्री ने संगठन में उनके विभिन्न पदों, जैसे एआईसीसी पदाधिकारी, केपीसीसी उपाध्यक्ष और राज्य गारंटी समिति के उपाध्यक्ष के रूप में उनकी सेवाओं को याद किया। उन्होंने कहा कि संगठनात्मक कुशलता और जनहित के कार्यों के माध्यम से कांग्रेस पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में हेगड़े का योगदान हमेशा बेमिसाल रहेगा।
एक सक्रिय और समर्पित जननेता का अंत
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सूरज हेगड़े को याद करते हुए कहा कि आज राज्य ने एक बेहद सक्रिय और ऊर्जावान नेता को खो दिया है, जिनका पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ हमेशा एक जीवंत और बेहतरीन समन्वय रहता था। वह एक ऐसे नेता थे जो हर सुख-दुख में कार्यकर्ताओं के साथ खड़े नजर आते थे। राज्य की जनकल्याणकारी गारंटी योजनाओं को आम जनता तक सही तरीके से पहुंचाने और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को उसका हक दिलाने में उन्होंने बेहद महत्वपूर्ण और अग्रसर भूमिका निभाई थी।
सामाजिक न्याय की विरासत के सच्चे उत्तराधिकारी
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने हेगड़े के जीवन को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन पिछड़े समुदायों, दलितों और समाज के अन्य हाशिए पर पड़े कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया था। वह सही मायनों में अपने दादा देवराज उर्स द्वारा शुरू की गई समानता और सामाजिक न्याय की राजनीतिक विरासत के सच्चे उत्तराधिकारी थे। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सहित राज्य के कई अन्य बड़े नेताओं ने भी उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे कर्नाटक राज्य और कांग्रेस पार्टी के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति बताया है जिसकी भरपाई होना नामुमकिन है।


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