बांग्लादेश में धार्मिक तनाव, राधा-गोविंद मंदिर को लेकर विवाद
ढाका: बांग्लादेश के गैबांधा जिले के हंसबारी गांव में स्थित ऐतिहासिक राधा-गोविंद मंदिर की सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। देश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एक मानवाधिकार संगठन ने दावा किया है कि कुछ असामाजिक तत्व इस ऐतिहासिक मंदिर पर हमला करने और उसे जमींदोज करने की लगातार धमकियां दे रहे हैं। इन धमकियों के बाद से स्थानीय हिंदू समुदाय और आसपास के निवासियों में डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल और सुरक्षा की मांग
धार्मिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने वाले प्रमुख संगठन ‘बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद’ के अनुसार, मंदिर को नुकसान पहुंचाने की धमकी से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। संगठन ने चेतावनी दी है कि इस तरह की उकसावे वाली हरकतों से इलाके में सांप्रदायिक तनाव भड़क सकता है और आपसी सामाजिक सद्भाव को भारी नुकसान पहुंच सकता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संगठन ने बांग्लादेश सरकार, स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक दलों और नागरिक समाज से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनकी मांग है कि नफरत फैलाने और माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वाले दोषियों की जल्द पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
मंदिर का ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व
स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह राधा-गोविंद मंदिर सिर्फ एक धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि इसका बड़ा सामाजिक महत्व भी है। इस विशाल मंदिर परिसर के भीतर एक वृद्धाश्रम, एक मुफ्त चिकित्सा सेवा केंद्र और समाज कल्याण से जुड़ी कई अन्य जनोपयोगी सुविधाएं संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा, लंबे समय से मंदिर के विकास और रख-रखाव का काम भी स्थानीय स्तर पर चल रहा है। ऐसे में इस ऐतिहासिक और जनकल्याणकारी स्थल को निशाना बनाए जाने की धमकी से आम जनता में भारी आक्रोश है और सभी लोग इसकी चौबीसों घंटे सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।
रिपोर्ट में अल्पसंख्यकों पर हिंसा को लेकर बड़ा खुलासा
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पिछले महीने ही जारी एक मानवाधिकार रिपोर्ट ने देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर कई चिंताजनक खुलासे किए हैं। ‘ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज’ (HRCBM) की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच महज चार महीनों के भीतर बांग्लादेश के 62 जिलों में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा की 505 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन मामलों में हत्या, मारपीट, अपहरण, यौन शोषण, जमीनों पर अवैध कब्जे और धार्मिक स्थलों पर तोड़फोड़ व आगजनी जैसी गंभीर वारदातें शामिल हैं।
मानवाधिकार संगठन का आरोप है कि ये घटनाएं छिटपुट नहीं हैं, बल्कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ते एक तय पैटर्न को दर्शाती हैं। कई मामलों में पुलिस और प्रशासन की सुस्ती और कमजोर जांच के चलते पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल सका है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है।


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