भाषा नीति पर गरमाई राजनीति, जयराम रमेश ने सरकार पर साधा निशाना
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा कक्षा 9 और 10 में तीन-भाषा फॉर्मूला (Three-Language Formula) लागू किए जाने के फैसले को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि इस निर्णय के पीछे कोई शैक्षणिक तर्क नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से सरकार के राजनीतिक एजेंडे से प्रेरित है। पार्टी के महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने इस नीतिगत बदलाव को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर सीधा निशाना साधा है और उनसे इस्तीफे की मांग की है।
सीबीएसई ने अपनी ही गवर्निंग बॉडी के फैसले पर लिया यू-टर्न: जयराम रमेश
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर सिलसिलेवार तरीके से इस फैसले की टाइमलाइन साझा करते हुए गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि:
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दिसंबर 2025 का फैसला: सीबीएसई की गवर्निंग बॉडी की बैठक में सर्वसम्मति से यह तय किया गया था कि जब तक एनसीईआरटी (NCERT) द्वारा विभिन्न भाषाओं की कक्षा-वार नई पाठ्यपुस्तकें जारी नहीं कर दी जातीं, तब तक स्कूलों में पुरानी भाषा व्यवस्था ही लागू रहेगी। इस आधिकारिक निर्णय पर तत्कालीन सीबीएसई अध्यक्ष और सचिव ने भी अपने हस्ताक्षर किए थे।
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मई 2026 का यू-टर्न: इसके ठीक छह महीने बाद, मई 2026 में सीबीएसई ने अचानक एक नया सर्कुलर जारी कर दिया। इसमें निर्देश दिया गया कि 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 और 10 में तीसरी भाषा को अनिवार्य रूप से जोड़ दिया जाए।
कक्षा 9 के छात्रों को कक्षा 6 की किताबें पढ़ाने का निर्देश जयराम रमेश ने हैरानी जताते हुए आरोप लगाया कि सीबीएसई ने स्कूलों से कहा है कि वे कक्षा 9 के छात्रों को तीसरी भाषा सिखाने के लिए एनसीईआरटी की कक्षा 6 की किताबों का उपयोग करें। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पिछले छह महीनों में एनसीईआरटी ने कक्षा 9 और 10 के लिए कोई नई किताबें जारी ही नहीं की हैं, तो अचानक ऐसा क्या बदल गया कि सीबीएसई को अपनी ही पाठ्यक्रम समिति की सिफारिशों को दरकिनार कर यह यू-टर्न लेना पड़ा?
लाखों छात्रों के भविष्य और स्वायत्तता पर संकट
जयराम रमेश ने कहा कि इस बिना तैयारी के लिए गए फैसले से देश भर के स्कूलों की शैक्षणिक योजनाएं (Academic Planning) पूरी तरह चरमरा गई हैं और इसका सीधा नकारात्मक असर लाखों छात्रों के भविष्य पर पड़ सकता है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई जैसे स्वायत्त (Autonomous) संस्थान अब शिक्षाविदों और विशेषज्ञों की सलाह मानने के बजाय पूरी तरह से सरकार के राजनीतिक एजेंडे की कठपुतली बनकर काम कर रहे हैं।
उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब भी किसी गड़बड़ी के लिए जवाबदेही तय करने की बात आती है, तो आईएएस अधिकारियों का तबादला कर दिया जाता है, जबकि मुख्य राजनीतिक नेतृत्व को हमेशा बचा लिया जाता है। रमेश ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे शैक्षणिक विशेषज्ञता का सम्मान न करने वाले केवल एक राजनीतिक व्यक्ति हैं, इसलिए उन्हें अपने पद पर रहने का कोई हक नहीं है और उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।
ओसएम (OSM) विवाद को लेकर भी घेरा
कांग्रेस ने इस मुद्दे के साथ-साथ हाल ही में हुए सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) विवाद को लेकर भी शिक्षा मंत्रालय को घेरा। पार्टी का आरोप है कि कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन (डिजिटल चेकिंग) में बड़े पैमाने पर गंभीर अनियमितताएं और कमियां पाई गई हैं।
गौरतलब है कि इसी विवाद के बाद सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए सीबीएसई अध्यक्ष राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया था। वर्तमान में केंद्र सरकार ने इस ओएसएम प्रणाली की खरीद प्रक्रिया (Procurement Process) की जांच के लिए क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान की अगुवाई में एक सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है, जो पूरे मामले की रिपोर्ट सौंपेगी।


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