शाहीन बाग क्षेत्र में छिपाए गए दस्तावेजों की तलाश तेज
आगरा: धर्मांतरण सिंडिकेट का भंडाफोड़, शाहीन बाग से लेकर पाकिस्तान तक जुड़े हैं गिरोह के तार
आगरा में सामने आए धर्मांतरण मामले की जांच में पुलिस के हाथ कई चौंकाने वाले सुराग लगे हैं, जिनसे इस पूरे नेटवर्क की गहराई का पता चलता है। मुख्य आरोपी परवेज अख्तर ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया है कि मौलाना कलीम सिद्दीकी के दामाद के दवा केंद्र के माध्यम से धर्मांतरण से जुड़े वित्तीय लेन-देन का प्रबंधन किया जा रहा था। गिरफ्तारी के डर से आरोपियों ने इस काले कारोबार से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेजों और रजिस्टरों को दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में छिपा दिया है, जिन्हें बरामद करने के लिए पुलिस की टीमें सक्रिय हो गई हैं। इसके अतिरिक्त, गिरोह के एक अन्य सदस्य तलमीज उर रहमान ने स्वीकार किया कि फंडिंग और हवाई यात्राओं के टिकटों का रिकॉर्ड दिल्ली के बाटला हाउस स्थित एक परिचित के घर पर सुरक्षित रखा गया है।
डिजिटल साक्ष्यों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का हुआ सनसनीखेज खुलासा
इस गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद आधुनिक और संगठित रही है, जिसमें तकनीक का सहारा लेकर हिसाब-किताब रखा जाता था। आरोपी जतिन कपूर ने पूछताछ में बताया कि वह आर्थिक मदद और चंदे के लेन-देन का पूरा विवरण टैबलेट पर एक्सेल फाइलों के जरिए प्रबंधित करता था ताकि पारदर्शिता बनी रहे और कोई हेर-फेर न हो सके। सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया है कि इस गिरोह के तार पड़ोसी देश पाकिस्तान से भी जुड़े हुए हैं और आरोपी लगातार वहां बैठे संदिग्ध आकाओं के संपर्क में थे। पुलिस ने इनके पास से ऐसे कई अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबर भी बरामद किए हैं जिनसे नियमित अंतराल पर बातचीत की जा रही थी।
कश्मीर से भरतपुर तक फैला नेटवर्क और पुलिस की आगामी कार्रवाई
हसन मोहम्मद से हुई पूछताछ ने इस नेटवर्क के विस्तार को और भी स्पष्ट कर दिया है, जिससे पता चलता है कि अब्दुल रहमान के माध्यम से इस गिरोह ने कश्मीर से लेकर कई अन्य राज्यों में अपना जाल फैला रखा था। इस सिंडिकेट के सदस्यों की सूची और उनके संपर्क नंबरों वाला एक गुप्त रजिस्टर राजस्थान के भरतपुर में छिपाया गया है, जिसे पुलिस जल्द ही अपने कब्जे में लेगी। डीसीपी क्राइम आदित्य सिंह के अनुसार, इस पूरे मामले में अब तक 5 से 6 नए संदिग्धों के नाम प्रकाश में आए हैं और फंडिंग के स्रोतों की गहराई से जांच की जा रही है। आरोपियों को जेल भेज दिया गया है, लेकिन मामले की कड़ियों को पूरी तरह जोड़ने के लिए पुलिस बुधवार को अदालत में प्रार्थनापत्र देकर आरोपियों की सात दिनों की रिमांड मांगेगी ताकि इस राष्ट्रविरोधी नेटवर्क का पूरी तरह खात्मा किया जा सके।


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