भीम ने की शिवलिंग की स्थापना तो अर्जुन ने बाण चलाकर बनाया झरना, यहां है प्रकृति और इतिहास का संगम
दक्षिण भारत में कई ऐसे मंदिर हैं, जिस पर श्रद्धालुओं की बेहद आस्था होती है. हरे-भरे पश्चिमी घाटों में स्थित मंदिर भक्तों के साथ-साथ पर्यटन के आकर्षण का भी बड़ा केंद्र हैं. आज हम ऐसे मंदिर की जानकारी लेकर आए हैं, जिसका इतिहास महाभारत के पांडवों से जुड़ा है. कर्नाटक राज्य के शिमोगा जिले के सागर में स्थित भीमेश्वर मंदिर प्रकृति और आस्था का अनूठा संगम है. प्रकृति की गोद में विराजमान भगवान शिव यहां आए हर भक्त की मनोकामना पूरी करते हैं और जिंदगी में आई हर परेशानी से मुक्ति भी दिलाते हैं. आइए जानते हैं भीमेश्वर मंदिर के बारे में खास बातें…
शांत वातावरण के लिए विश्व में प्रसिद्ध
भीमेश्वर मंदिर कर्नाटक के सबसे पुराने मंदिरों में शामिल है, लेकिन जंगलों में होने की वजह से मंदिर का रखरखाव ठीक से नहीं हो पाता है. पौराणिक कथा की मानें तो मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है. जब पांडवों को अज्ञातवास मिला तो उन्होंने इस स्थान पर भी शरण ली थी. यह मंदिर अपनी शानदार वास्तुकला और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है.
पांडवों ने किया था समय व्यतीत
मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों ने वनवास के दौरान कुछ समय यहां व्यतीत किया था. मंदिर की स्थापना महाबली भीम ने की थी और शिवलिंग भी वही लेकर आए थे. भगवान शिव को ठंडी जलधारा अर्पित करने के लिए अर्जुन ने बाण चलाकर भीमेश्वर झरने का निर्माण किया था. मंदिर के निकट भीमेश्वर झरना भगवान शिव को आज तक ठंडी जलधारा अर्पित कर रहा है. यही कारण है कि मंदिर का नाम भीम पर रखा गया है.
काले पत्थर से मंदिर का निर्माण
मंदिर का निर्माण काले पत्थर से किया गया है. मंदिर के भीतर कई मजबूत स्तंभ बनाए गए हैं, जिस पर महाभारत काल की प्रतिमाएं बनी हैं. मंदिर का निर्माण चालुक्य राजा भद्देगा ने कराया था. मंदिर के भीतर शिवलिंग, भगवान गणेश, नंदी महाराज और भगवान विष्णु की प्रतिमाएं मौजूद हैं. मंदिर में आज भी पूजा-अर्चना होती है और सावन और शिवरात्रि के मौके पर मंदिर में बड़े आयोजन भी किए जाते हैं.
इस तरह पहुंचें भीमेश्वर मंदिर
स्थानीय लोगों के बीच मंदिर को लेकर बहुत मान्यता है. जंगलों के बीच होने की वजह से मंदिर तक ट्रैकिंग करके जाना पड़ता है क्योंकि वाहन का मंदिर तक पहुंच पाना बहुत मुश्किल है. निकटतम रेलवे स्टेशन थलागुप्पा से मंदिर 53 किलोमीटर दूर है. वहीं, मंदिर शिमोगा से 138 किमी और बेंगलुरु से 462 किमी दूर है. मुख्य सड़क से मंदिर तक पहुंचने के लिए दो किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है.


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