पहलगाम: पहलगाम की वादियों में आज का दिन सन्नाटे और यादों के बीच बीता। ठीक एक साल पहले, 22 अप्रैल 2025 को 'मिनी स्विट्जरलैंड' के नाम से मशहूर बैसरन घाटी में हुई उस क्रूर आतंकी घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था, जिसमें 25 पर्यटकों और एक स्थानीय निवासी ने अपनी जान गंवाई थी। उस त्रासदी के जवाब में भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के जरिए सीमा पार आतंकियों को कड़ा सबक सिखाया, लेकिन एक साल बाद भी पहलगाम अपनी पुरानी रौनक और पर्यटकों का पूर्ण विश्वास हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहा है।

बैसरन घाटी: बंद दरवाजे और अधूरा पर्यटन
हमले के बाद से ही बैसरन का वह प्रसिद्ध घास का मैदान बंद है, जो कभी पहलगाम के पर्यटन की जान हुआ करता था। इस बंदी का सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा है:

पर्यटकों की संख्या में गिरावट: सामान्य तौर पर यहाँ साल भर में 12-15 लाख पर्यटक आते थे, जो पिछले एक साल में सिमटकर महज 4 लाख रह गए हैं।

ठहराव की कमी: टैक्सी ड्राइवर संघ के अनुसार, सैलानी पहलगाम तो आ रहे हैं, लेकिन असुरक्षा या मुख्य स्थलों के बंद होने के कारण वहां रात नहीं रुक रहे।

व्यवसाय पर चोट: मुख्य रूप से बेटाब वैली ही खुली होने के कारण करीब 5,000 पोनीवाले और होटल व्यवसायी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

श्रद्धांजलि और सुरक्षा का नया घेरा
पहलगाम प्रशासन ने सुरक्षा और पर्यटन के बीच संतुलन बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:

शहीद स्मारक: बैसरन के प्रवेश द्वार पर सरकार ने एक स्मारक बनाया है, जहाँ हमले में जान गंवाने वाले 26 लोगों के नाम अंकित हैं। पर्यटक यहाँ आकर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

QR कोड आधारित सुरक्षा: देश में पहली बार पहलगाम में एक अनूठी पहचान प्रणाली लागू की गई है। टैक्सी चालकों, पोनीवालों और होटल कर्मचारियों का सत्यापन कर उन्हें QR कोड जारी किए जा रहे हैं। अब तक 7,000 लोगों को यह कोड मिल चुका है, जिसका लक्ष्य 25,000 तक पहुँचने का है।

स्थानीय मांग और भविष्य की उम्मीद
स्थानीय व्यापारियों और पोनीवाला एसोसिएशन का मानना है कि जब तक बैसरन और चंदनवाड़ी जैसे प्रमुख स्थलों को पूरी तरह नहीं खोला जाता, तब तक पर्यटकों का भरोसा बहाल करना मुश्किल है। मुंबई से आए पर्यटकों का भी कहना है कि वे बिना डरे यहाँ आए हैं, लेकिन मुख्य स्थलों की बंदी उन्हें निराश करती है।

वर्तमान में सुरक्षा बल बैसरन जाने वाले रास्तों पर तैनात हैं और एक निश्चित सीमा के बाद आवाजाही प्रतिबंधित है। पहलगाम के लोग अब उस दिन का इंतजार कर रहे हैं जब उनकी घाटी से डर का साया पूरी तरह हटेगा और बैसरन में एक बार फिर पर्यटकों की हंसी गूँजेगी।