अचानक हमले से दहशत, बंदरों ने किया घायल
सक्ती|छत्तीसगढ़ का सक्ती जिला इन दिनों बंदरों के आतंक से परेशान है. बंदर झुंड बनाकर लोगों पर हमला कर रहे हैं. बंदरों की वजह से गांववालों में दहशत फैल गई है. बंदर इस कदर हमलावर हो गए हैं कि बाहर तो छोड़िए गांव के लोग अपने घरों में भी सुरक्षित नहीं हैं. कई लोगों को बंदर ने काटकर बुरी तरह घायल कर दिया है|
बंदरों के काटने से 20 लोग घायल
सक्ती जिले में बंदरों ने लोगों को इतनी बुरी तरह काटा है, कि लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. इसमें एक व्यक्ति के घुटने पर बंदर ने बुरी तरह काट लिया है. जख्म के दो गहरे निशान है. खून इतना बह रहा है कि गमछे से पैर बांधना पड़ा है. दूसरी तरफ एक व्यक्ति के पैर पर गहरा चोट है. बंदर ने पैर के बड़े हिस्से को काटकर घायल कर दिया है. ये तो महज दो केस हैं. इसी तरह बंदर ने 20 लोगों को काटकर घायल किया है. किसी के हाथ को तो किसी के कंधे को. बंदर ने बुरी तरह चोट पहुंचाई है. जिनमें से 4-5 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है और इलाज के लिए इन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है|
कई गांव के लोग परेशान
और ऐसा नहीं है कि ये घटना सिर्फ एक गांव की है, बल्कि तीन गांव के लोगों का बंदरों ने जीना हराम कर दिया है. सक्ति जिले के कलमी, मालखरौदा और पोता गांव में करीब 10 दिनों से बंदरों ने उत्पात मचा रखा है. गांव में बंदरों का एक झुंड घूम रहा है. और इनमें से एक बंदर इतना ज्यादा हमलावर हो गया है कि घरों में घुसकर हमला कर दे रहा है. बंदरों के काटने से राह चलते लोग तो संकट में हैं ही साथ में घर के अंदर भी लोग सुरक्षित नहीं हैं. डरे-सहमे गांववाले जल्द से जल्द इन बंदरों को पकड़ने की मांग कर रहे हैं|
गांव वाले दे रहे पहरा
वहीं बंदरों को भगाने के लिए गांववाले लाठी-डंडे लेकर पहरा दे रहे हैं. इन बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम कई बार प्रयास कर चुकी है और अब इनका साथ देने के लिए बजरंग दल के साथ कई स्थानीय समितियों के सदस्य भी जुड़ गए हैं|
वन विभाग और स्थानीय प्रशासन हालात पर नहीं पा सके काबू
इन बंदरों के काटने से इंफ्केशन या रेबीज फैल सकता है. जिससे जान भी जा सकती है, लेकिन 10 दिन बीत जाने के बाद भी वन विभाग और स्थानीय प्रशासन हालात पर काबू नहीं पा सका है. घटना को लेकर वन विभाग का कहना है कि एक जख्मी बंदर को रेस्क्यू करके इलाज के लिए भेजा गया है. जबकि दूसरा बंदर जो हमले कर रहा है. वो अभी ऊंचे पेड़ पर बैठा हुआ है. जिससे उस तक पहुंचने में दिक्कत हो रही है और रेस्क्यू के दौरान हमले का खतरा बना हुआ है. दूसरी तरफ वन विभाग ने बंदरों को लेकर गांववालों से सतर्क रहने की अपील की है|


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