वैशाख कब से शुरू है? कैसे हुआ इसका नामकरण, क्यों है सबसे श्रेष्ठ माह, जानें तारीख, मुहूर्त, नियम, क्या करें
हिंदू नववर्ष 2083 का दूसरा माह वैशाख का प्रारंभ चैत्र पूर्णिमा के अगले दिन से होगा. हिंदी कैलेंडर के 12 महीनों में वैशाख को सबसे महत्वपूर्ण माह कहा गया है. इस महीने में स्नान, दान, पूजा, पाठ का विशेष महत्व है. इस माह में ग्रहों के राजा सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में होते हैं. मेष संक्रांति से सौर कैलेंडर का नया साल भी प्रारंभ होता है. यह नया सौर वर्ष होता है.
वैशाख 2026 का प्रारंभ
वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को वैशाख का पहला दिन होता है. वैशाख कृष्ण प्रतिपदा तिथि 2 अप्रैल को सुबह 07:41 ए एम से प्रारंभ होगी और यह तिथि 3 अप्रैल को सुबह 08:42 ए एम तक है. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर वैशाख माह का शुभारंभ 3 अप्रैल दिन शुक्रवार से होगा.
व्याघात योग और चित्रा नक्षत्र में शुरू होगा वैशाख
वैशाख माह का प्रारंभ व्याघात योग और चित्रा नक्षत्र में हो रहा है. 3 अप्रैल को व्याघात योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 02:09 पी एम तक है, उसके बाद से हर्षण योग लगेगी. वहीं चित्रा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर शाम 07:25 पी एम तक है, उसके बाद स्वाति नक्षत्र है.
वैशाख के पहले दिन सुबह 6:09 बजे से लेकर सुबह 10:51 बजे तक का समय शुभ है. उस दिन चर-सामान्य मुहूर्त 06:09 ए एम से 07:43 ए एम तक, उसके बाद लाभ-उन्नति मुहूर्त 07:43 ए एम से 09:17 ए एम तक और फिर अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 09:17 ए एम से 10:51 ए एम तक है. उस दिन का ब्रह्म मुहूर्त 04:37 ए एम से 05:23 ए एम तक रहेगा, जबकि अभिजीत मुहूर्त ठीक दोपहर 12:00 बजे से लेकर 12:50 बजे तक है.
वैशाख 2026 का समापन
वैशाख माह का समापन वैशाख पूर्णिमा के दिन होता है. इस साल वैशाख पूर्णिमा 1 मई दिन शुक्रवार को है. इस आधार पर वैशाख का समापन 1 मई को होगा. वैशाख पूर्णिमा तिथि 30 अप्रैल को रात 9 बजकर 12 मिनट से 1 मई को रात 10 बजकर 52 मिनट तक है.
वैशाख माह का महत्व
देवर्षि नारद ने राजा अंबरीष को वैशाख माह के महत्व को बताया है. स्कंद पुराण में इसका वर्णन मिलता है. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से सभी विद्याओं में वेद और मंत्र, पेड़ों में कल्पतरु, गायों में कामधेनु, पक्षियों में गरुड़, धातुओं में सोना उत्तम माने गए हैं, वैसे ही साल के 12 महीनों में वैशाख को श्रेष्ठ माना गया है.
इस माह में स्नान और दान से प्राप्त किए गए पुण्य अक्षय होते हैं, वे नष्ट नहीं होते हैं, वे मनुष्य के साथ हमेशा रहते हैं. इसी वजह से अक्षय पुण्य देने वाली अक्षय तृतीया भी इसी माह में आती है. इस वजह से वैशाख माह में पूजा, पाठ, जप, ध्यान आदि का महत्व बढ़ जाता है.
कैसे हुआ वैशाख माह का नामकरण?
हिंदी कैलेंडर में माह का नाम पूर्णिमा के दिन जिस नक्षत्र में चंद्रमा होता है, उस आधार पर किया जाता है. वैशाख माह का नाम विशाखा नक्षत्र के नाम से लिया गया है. वैशाख पूर्णिमा के दिन चंद्रमा विशाखा नक्षत्र में होते हैं, इसलिए इसका नाम वैशाख पड़ा.


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