चैत्र नवरात्रि तिथि? कलश स्थापना मुहूर्त? उपाय से लेकर सवारी प्रभाव तक देवघर के ज्योतिषाचार्य से जानें सब
हिंदू धर्म में नवरात्र का बहुत विशेष महत्व माना जाता है. पूरे साल में चार बार नवरात्र मनाए जाते हैं. इनमें शारदीय नवरात्र, बसंत नवरात्र, शिशिर नवरात्र और गुप्त नवरात्र शामिल हैं. ये सभी अलग-अलग महीनों में आते हैं और हर नवरात्र का अपना अलग धार्मिक महत्व होता है. लेकिन जो नवरात्र अभी आने वाला है उसे चैत्र नवरात्र कहा जाता है. यह नवरात्र हिंदू नववर्ष की शुरुआत के साथ मनाया जाता है, इसलिए इसे साल का पहला और बेहद महत्वपूर्ण नवरात्र माना जाता है.
कब से शुरु हो रहा चेत्र नवरात्री
साल 2026 में चैत्र नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च से होने जा रही है. यह पर्व पूरे 10 दिनों तक चलेगा, जिसमें 9 दिनों तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. इन नौ दिनों में श्रद्धालु व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और मां दुर्गा से सुख-समृद्धि और शांति की कामना करते हैं. नवरात्र के दौरान घरों और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और पूरे माहौल में भक्ति का रंग देखने को मिलता है.
क्या कहते है देवघर के ज्योतिषाचार्य :
देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल के अनुसार, 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 40 मिनट तक अमावस्या तिथि रहने वाली है. इसके बाद सुबह 7 बजे से 08बजकर 35 मिनट तक चैत्र नवरात्र के लिए कलश स्थापना की जा सकती है. वहीअगर इस समय नहीं कर पाए तो अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12बजकर 05 मिनट से 12बजकर 53 तक कलश स्थापन कर सकते है.हिंदू धर्म में कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है. इसे नवरात्र की शुरुआत का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है. इस दिन लोग अपने घरों और मंदिरों में विधि-विधान से कलश स्थापित कर मां दुर्गा की पूजा आरंभ करते हैं.
दुर्गा सप्तशती का पाठ
नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. भक्त पूरे श्रद्धा भाव से व्रत रखते हैं और मां की आराधना करते हैं. इस दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करना भी बेहद शुभ माना जाता है. मान्यता है कि अगर नवरात्र में सच्चे मन से दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाए तो जीवन की कई परेशानियां दूर हो जाती हैं और मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
कब है अष्ट्मी और नवमी तिथि :
इस साल नवरात्र के दौरान 26 मार्च 2026 को अष्टमी का व्रत रखा जाएगा, जिसे दुर्गा अष्टमी के नाम से जाना जाता है. इस दिन कन्या पूजन का भी विशेष महत्व होता है. इसके बाद 27 मार्च को महानवमी की पूजा की जाएगी. नवरात्र का समापन 28 मार्च 2026 को विजयादशमी दशमी तिथि के साथ होगा. इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में भी मनाया जाता है.
करे दुर्गा सप्तशती का पाठ :
धार्मिक मान्यता के अनुसार चैत्र नवरात्र में मां दुर्गा की सच्चे मन से पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है. पंडित नंदकिशोर मुद्गल के अनुसार अगर श्रद्धालु कलश स्थापना के बाद नियमित रूप से पूजा करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें, तो मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं. इसलिए चैत्र नवरात्र को पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाना चाहिए.


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