राजद की रणनीति: तेजस्वी यादव को राज्यसभा नहीं भेजने पर अंदरूनी चर्चाएँ
पटना। बिहार में राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी हलचल तेज है। महागठबंधन और एनडीए दोनों ही गठबंधनों में पांचवीं सीट के लिए रणनीतियां लगातार बदल रही हैं। चर्चा थी कि राजद अध्यक्ष तेजस्वी यादव खुद राज्यसभा चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन महागठबंधन के सूत्र ने इस चर्चा को पूरी तरह खारिज किया। राजद सूत्र ने स्पष्ट किया कि राजद की बैठक में ऐसा कोई प्रस्ताव न आया और तेजस्वी राज्यसभा चुनाव 2026 में नहीं उतरने वाले है। वे अपनी वर्तमान जिम्मेदारी यानी बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में ही काम करते रहने वाले है।
लेकिन अब सवाल उठता है कि राजद का उम्मीदवार कौन होगा। राजद के दो राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल समाप्त होने वाला है और दोनों ही लालू प्रसाद यादव के करीबी हैं। इस बार पार्टी को अपने महागठबंधन के सीमित संख्याबल के बावजूद किसी एक को जीतने के लिए पूरी मेहनत करनी होगी। सूत्रों के मुताबिक, राज्यसभा उम्मीदवार के लिए राजद के अंदर से दो नाम उभरकर सामने आए हैं। पहला नाम है भूमिहार समाज के एडी सिंह यानी अमरेंद्रधारी सिंह, जो पटना के पालीगंज से हैं। दूसरा नाम है प्रेमचंद गुप्ता, जो लालू प्रसाद यादव के बेहद करीबी माने जाते हैं। फिलहाल खबरों और सूत्रों के अनुसार, इस रेस में गुप्ता का पलड़ा थोड़ा भारी दिख रहा है। हालांकि, नॉमिनेशन प्रक्रिया अभी बाकी है और पूरी तस्वीर तब स्पष्ट होगी।
राजद इस राज्यसभा चुनाव में किसी भी हालत में हार नहीं मानने का संकेत दे रही है। तेजस्वी यादव के न उतरने के बाद अब पार्टी पूरी ताकत और रणनीति के साथ अपने दो करीबी नेताओं में से किसी एक को राज्यसभा भेजने की तैयारी में है। यह चुनाव बिहार की सियासी गुत्थियों और महागठबंधन की ताकत की परीक्षा भी साबित होगा। इस तरह, राज्यसभा चुनाव 2026 में राजद के लिए निर्णायक मोड़ यही है कि लालू प्रसाद यादव किसे अपनी नजरों में चुने और किसे राज्यसभा का टिकट दें। संभावना के मुताबिक, गुप्ता इस बार लालू यादव के दांव पर भारी नजर आ रहे हैं, लेकिन अंतिम नतीजा नॉमिनेशन और वोटिंग के बाद ही स्पष्ट होगा। इस पूरी प्रक्रिया से यह साफ हो गया है कि तेजस्वी के चुनाव में न उतरने के फैसले के बाद भी राजद पूरी रणनीति के साथ मैदान में है और अपने करीबी नेताओं में से किसी एक को राज्यसभा भेजने की कोशिश कर रहा है।


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