मृत्यु के बाद या कल्पवास पूर्ण होने पर ही क्यों होता है शय्या दान? जानिए इस रहस्यमयी दान का आध्यात्मिक सच
तीर्थ में दान करना हमेशा से शुभ माना गया है, लेकिन प्रयागराज में माघ महीने के कल्पवास के समय किया गया दान खास माना जाता है. मान्यता है कि यहां किया गया दान कई गुना फल देता है. कल्पवासी पूरे महीने साधारण जीवन जीते हैं-जमीन पर सोना, सादा भोजन, संयम और भक्ति. इसी दौरान वे अपनी क्षमता के अनुसार दान भी करते हैं. आम तौर पर कल्पवास में गाय, घी, तिल, सोना, भूमि, वस्त्र, अन्न, गुड़, चांदी और नमक का दान बताया गया है. इसके अलावा वेणी दान, गुप्त दान और शय्या दान का भी विशेष महत्व माना जाता है. हर दान का अपना अलग उद्देश्य और धार्मिक भाव होता है.
शय्या का मतलब है सोने का बिस्तर-जैसे खाट, पलंग, गद्दा, चादर, तकिया आदि. जब ये चीजें धार्मिक भाव से दान की जाती हैं, उसे शय्या दान कहा जाता है. इसका सीधा भाव है कि दान देने वाला अपने आराम की वस्तु किसी और को समर्पित करता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार यह दान आत्मा की शांति और पुण्य से जुड़ा माना जाता है. इसे त्याग और सेवा का प्रतीक भी समझा जाता है.


कांग्रेस और सरकार पर अखिलेश का तीखा हमला, संसद में बयान से बढ़ी सियासी हलचल
श्रेयस अय्यर के सामने बड़ी चुनौती, जिम्बाब्वे दौरे पर युवा खिलाड़ियों को खुद को साबित करने का मौका
'असली सिंघम जंतर-मंतर पर है', अजय देवगन के पोस्ट पर सोशल मीडिया में मचा बवाल
शराब पीकर ड्राइविंग की स्वीकारोक्ति, पूर्व बल्लेबाज डेविड वॉर्नर पर कोर्ट का फैसला बाकी
दिल्ली मेट्रो यात्रियों के लिए जरूरी खबर, 16 स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट बंद
महंगाई और आर्थिक संकट के बीच पाकिस्तान में गरीबी का बढ़ता ग्राफ
हादसों पर हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी, आवारा मवेशियों पर सरकार से पूछा- कब होगी कार्रवाई?
पकौड़े खाने का है मन? बिना तेल वाली ये रेसिपी बना देगी दिन खास
अखिलेश यादव और स्पीकर के बीच तीखी नोकझोंक, दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित