सरकार ने ऐसी नीतियों पर ध्यान केंद्रित किया जिनका जमीनी स्तर पर खास असर नहीं
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने केंद्रीय बजट से पहले केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार ने ऐसी नीतियों पर ध्यान केंद्रित किया है जिनका जमीनी स्तर पर कोई खास असर नहीं है। उन्होंने गरीबों, किसानों, युवाओं और मध्यम वर्ग को राहत देने वाले उपायों की भी मांग की।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पायलट ने कहा कि पिछले कई सालों से हमने देखा है कि बजट सरकार के इरादों को व्यक्त करने का एक जरिया बन गया है...सालों से सत्ता में होने के बावजूद, मुझे लगता है कि बीजेपी सरकार ने उन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया है जिनका जमीनी स्तर पर कोई खास असर नहीं है। सरकार ने एमजीएनआरईजीए को करीब खत्म करने के लिए एक नया कानून बनाया। वे कहते हैं कि वे इसमें सुधार कर रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि देश में औसतन 35 दिनों तक एमजीएनआरईजीए का इस्तेमाल हो रहा है। वे 125 दिनों का वादा कर रहे हैं।
पहले जो फैसले गांवों में पंचायतों में लिए जाते थे, जहां सरपंच और जन प्रतिनिधि पैसों की मांग करते थे और बजट की कोई कमी नहीं होती थी। अब सरकार बजट तय कर लेती है और काम दिल्ली थोप देती है। इस तरह यह सरकार गरीबों की आर्थिक सुरक्षा छीनने की कोशिश कर रही है। उन्होंने तीन काले कानून भी उसी हठधर्मिता से बनाए हैं...हम चाहते हैं कि आने वाले वित्तीय वर्ष में वे गरीबों, किसानों, युवाओं और मध्यम वर्ग को राहत दें।
इस बीच केंद्रीय बजट पेश होने से पहले, विपक्षी नेताओं ने संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने केंद्रीय बजट पर शक व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले बजटों से केवल लोगों के एक छोटे से वर्ग को ही लाभ हुआ है और उन्होंने सरकार से यह मूल्यांकन करने का आग्रह किया कि क्या उसने अपने वादों को पूरा किया है।


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