नए तरीके से महंगाई मांपेगी मोदी सरकार, Netflix जैसे OTT खर्च में लिस्ट में होंगे शामिल
भारत में महंगाई मापने का तरीका अब बदलने जा रहा है। सरकार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को नए आधार वर्ष के साथ पेश करने की तैयारी में है। अब तक महंगाई की गणना 2012 को आधार मानकर की जाती थी, लेकिन बीते एक दशक में लोगों की जीवनशैली, खर्च करने के तरीके और जरूरतें इतनी बदल चुकी हैं कि पुराना पैमाना हकीकत को ठीक से नहीं दिखा पा रहा था। इसी वजह से सरकार ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index) का आधार वर्ष 2024 करने का फैसला लिया है। नया उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 12 फरवरी 2026 से लागू होगा और उसी दिन जनवरी 2026 की खुदरा महंगाई के आंकड़े नए ढांचे के तहत जारी किए जाएंगे।
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प्रोडक्ट्स और सर्विसेज की संख्या में होगा इजाफा
इंडेक्स में शामिल वस्तुओं और सेवाओं की संख्या भी बढ़ेगी। अभी जहां करीब 299 सामान हैं, वहीं नए ढांचे में इनकी संख्या बढ़कर 358 हो जाएगी। इससे महंगाई की गणना ज्यादा विस्तृत और वास्तविक खर्च के करीब दिखाई देने की संभावना है।सरकार और एक्सपर्ट्स का मानना है कि नया उपभोक्ता मूल्य सूचकांक न सिर्फ आम आदमी की बदलती जरूरतों को बेहतर तरीके से दर्शाएगा, बल्कि भारतीय रिजर्व बैंक को मौद्रिक नीति तय करने में भी ज्यादा सटीक संकेत देगा। ब्याज दरों से जुड़े फैसले अब ज्यादा मजबूत आंकड़ों के आधार पर लिए जा सकेंगे। नया सूचकांक बदलती अर्थव्यवस्था की झलक दिखाने वाला कदम माना जा रहा है।
ई-कॉमर्स से आंकड़े लिए जाएंगे
डेटा जुटाने के तरीके में भी बदलाव किया जा रहा है। अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से भी कीमतें जुटाई जाएंगी। हवाई किराए, बिजली दरों और ऑनलाइन सेवाओं के दाम ज्यादा नियमित और आधुनिक तरीकों से रिकॉर्ड किए जाएंगे। इससे आंकड़ों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और सूचकांक वास्तविक बाजार के ज्यादा करीब होगा।
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सूचकांक में वास्तविक खर्च शामिल होगा
नए सूचकांक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें अब उन चीजों और सेवाओं को शामिल किया जा रहा है, जिन पर आज आम आदमी वास्तव में खर्च कर रहा है। डिजिटल युग में स्मार्टफोन, इंटरनेट और ऑनलाइन सेवाएं जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं, लेकिन पुराने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में इनका असर बहुत सीमित था। अब स्मार्टफोन, वायरलेस ईयरफोन, फिटनेस बैंड जैसी आधुनिक वस्तुएं महंगाई की गणना में जगह पाएंगी। इसके साथ ही ओटीटी प्लेटफॉर्म जैसे नेटफ्लिक्स और अन्य डिजिटल सब्सक्रिप्शन सेवाओं को भी इसमें शामिल किया जा रहा है।
वीसीआर हटेंगे, ओला उबर जुड़ेंगे
ऐप आधारित टैक्सी सेवाएं जैसे उबर और ओला, ऑनलाइन शॉपिंग के दाम और अंतरराष्ट्रीय हवाई किराए भी अब महंगाई के आंकड़ों में गिने जाएंगे। अगर इन सेवाओं के दाम बढ़ते या घटते हैं, तो उसका असर सीधे सूचकांक पर दिखेगा। ग्रामीण इलाकों में किराए को भी पहली बार शामिल किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, पुराने जमाने की वे चीजें जो अब लगभग इस्तेमाल में नहीं हैं, जैसे वीडियो कैसेट रिकॉर्डर या ऑडियो कैसेट, उन्हें सूची से हटा दिया गया है।
खाने-पीने की चीजों का सरचार्ज घटेगा
एक और बड़ा बदलाव खाने-पीने की चीजों के वजन को लेकर है। पुराने सूचकांक में खाद्य और पेय पदार्थों का हिस्सा करीब 46 प्रतिशत था, जो अब घटकर लगभग 36–37 प्रतिशत रह जाएगा। इसका मकसद यह है कि सिर्फ सब्जी या अनाज की कीमतों में उतार-चढ़ाव से महंगाई के आंकड़े जरूरत से ज्यादा ऊपर-नीचे न हों। अब सेवाओं और गैर-खाद्य वस्तुओं का असर सूचकांक में पहले के मुकाबले ज्यादा दिखेगा, जिससे महंगाई की तस्वीर संतुलित बनेगी।


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