भारत-यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौता अंतिम चरण में, EU प्रमुख ने इसे बताया ऐतिहासिक
दावोस । यूरोपीय संघ (EU) की प्रमुख उर्सुला वॉन डर लेयेन (Ursula von der Leyen) ने कहा है कि भारत (India) और यूरोपीय संघ (European Union) के बीच होने वाला मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अब अपने निर्णायक चरण में पहुंच गया है। उन्होंने दावोस में चल रहे विश्व आर्थिक मंच (WEF) में कहा कि दोनों पक्ष एक “ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बेहद करीब” हैं, जिसे कुछ लोग “मदर ऑफ ऑल डील्स” भी कह रहे हैं। अपने संबोधन में वॉन डर लेयेन ने कहा कि यूरोप टैरिफ की बजाय निष्पक्ष व्यापार, अलगाव की बजाय साझेदारी और शोषण की बजाय टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना चाहता है। उन्होंने बताया कि दावोस के तुरंत बाद वह भारत दौरे पर जाएंगी, हालांकि अभी कुछ मुद्दों पर काम बाकी है।
क्यों है यह समझौता खास?
उन्होंने कहा, “हम एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते के मुहाने पर खड़े हैं। कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं।” EU प्रमुख के अनुसार, यह समझौता करीब दो अरब लोगों का साझा बाजार बनाएगा और दुनिया की लगभग 25% जीडीपी को कवर करेगा। इससे यूरोपीय कंपनियों को भारत जैसे तेजी से बढ़ते बाजार में पहले कदम का बड़ा फायदा मिलेगा।
भारत EU की रणनीति का केंद्र
वॉन डर लेयेन ने भारत को यूरोप की नई आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र इस सदी का आर्थिक केंद्र है और यूरोप भारत जैसे देशों के साथ अपने रिश्ते और मजबूत करना चाहता है। उन्होंने कहा कि EU खासतौर पर क्लीन टेक्नोलॉजी, डिजिटल ढांचा, दवाइयों और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ सप्लाई चेन मजबूत करना चाहता है।
जल्द भारत दौरा
EU प्रमुख के ये बयान ऐसे समय में आया है, जब वह 25 से 27 जनवरी 2026 के बीच भारत के दौरे पर आने वाली हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा और EU प्रमुख उर्सुला वॉन डर लेयेन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर भारत आएंगे। दोनों नेता भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे, जो भारत-EU संबंधों की बढ़ती अहमियत को दर्शाता है।
शिखर सम्मेलन और बिजनेस फोरम
27 जनवरी को नई दिल्ली में 16वां भारत-EU शिखर सम्मेलन होगा, जिसकी सह-अध्यक्षता प्रधानमंत्री मोदी करेंगे। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच उच्चस्तरीय बैठकें होंगी और एक भारत-EU बिजनेस फोरम भी आयोजित किया जाएगा। अगर यह व्यापार समझौता पूरा होता है तो यह दुनिया के सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी समझौतों में से एक होगा। इसमें केवल टैक्स नहीं, बल्कि सेवाएं, निवेश, डिजिटल व्यापार, पर्यावरण मानक, नियमों में सहयोग जैसे मुद्दे भी शामिल होंगे। भारत को इससे यूरोप जैसे बड़े बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी, जबकि यूरोप को भारत जैसे तेज़ी से बढ़ते देश में मजबूत पकड़ मिलेगी। हालांकि अभी कुछ जटिल मुद्दे बाकी हैं, लेकिन दावोस से आए संकेत बताते हैं कि भारत और यूरोपीय संघ इस ऐतिहासिक समझौते को पूरा करने के बेहद करीब हैं। आने वाले दिनों में नई दिल्ली में होने वाली बैठकें इस दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती हैं।


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