के कविता ने पिता केसीआर से बगावत कर खेला बड़ा सियासी दांव?
नई दिल्ली। तेलंगाना की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर होने के संकेत मिल रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) की बेटी के. कविता नई राजनीतिक पार्टी के गठन की दिशा में कदम बढ़ाती दिख रही हैं। सूत्रों की मानें तो के. कविता ने देश के जाने-माने चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर से इस सिलसिले में लंबी बातचीत की है। दावे किए जा रहे हैं कि के कविता ने पीके से करीब पांच दिनों तक विचार-विमर्श किया, जिसमें तेलंगाना के मौजूदा राजनीतिक हालात, जनभावनाएं और एक नए सियासी विकल्प की संभावनाओं पर चर्चा हुई। के. कविता, जो तेलंगाना जागृति नामक सांस्कृतिक संगठन की अध्यक्ष हैं, बीआरएस से निलंबन के बाद लगातार सक्रिय राजनीति में बनी हुई हैं। सितंबर 2025 में पार्टी से निलंबित किए जाने के तुरंत बाद उन्होंने विधान परिषद (एमएलसी) से भी इस्तीफा दे दिया था, जिसे हाल ही में परिषद के सभापति गुथा सुखेन्द्र रेड्डी ने स्वीकार कर लिया। बीआरएस नेतृत्व से टकराव के बाद कविता खुलकर अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश में जुट गई हैं। कविता का निलंबन उस समय हुआ था, जब उन्होंने अपने ही चचेरे भाई और वरिष्ठ नेता टी. हरीश राव तथा जे. संतोष कुमार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना में कथित अनियमितताओं के चलते इन नेताओं ने उनके पिता केसीआर की छवि को नुकसान पहुंचाया। इस बयान को पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुली बगावत के तौर पर देखा गया और इसके बाद उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हुई। निलंबन के बाद से के. कविता न सिर्फ बीआरएस, बल्कि सत्ताधारी कांग्रेस पर भी हमलावर हैं। वे दोनों दलों पर भ्रष्टाचार और जनविरोधी नीतियों का आरोप लगा चुकी हैं। तेलंगाना जागृति के मंच से वे लगातार महिलाओं, युवाओं और किसानों से जुड़े मुद्दे उठा रही हैं और खुद को एक वैकल्पिक नेतृत्व के तौर पर पेश कर रही हैं। दिसंबर 2025 में दिए गए एक बयान में के. कविता ने यहां तक कहा था कि वह एक दिन तेलंगाना की मुख्यमंत्री बनेंगी और राज्य गठन (2014) के बाद से हुए सभी “अन्यायों और कुकर्मों” की जांच कराएंगी। अब प्रशांत किशोर से हुई बातचीत के बाद यह कयास तेज हो गए हैं कि कविता जल्द ही नई राजनीतिक पार्टी की घोषणा कर सकती हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह न सिर्फ बीआरएस के लिए बड़ा झटका होगा, बल्कि तेलंगाना की राजनीति में एक नई धुरी भी बन सकती है।


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