क्रेडिट कार्ड पर ब्याज घटाने के ट्रंप के फरमान पर बैंकिंग सेक्टर में तीखी हलचल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के क्रेडिट कार्ड ब्याज दरों को सीमित करने के प्रस्ताव ने अमेरिका के बैंकिंग सेक्टर में तीखी हलचल पैदा कर दी है। उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से लिए गए इस कदम के खिलाफ देश के बड़े बैंकों के सीईओ खुलकर मैदान में उतर आए हैं। उनका कहना है कि यह फैसला न केवल बैंकिंग उद्योग बल्कि पूरी अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है।

ट्रंप का फरमान और बदला रुख

ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे क्रेडिट कार्ड ब्याज दरों पर एक साल के लिए 10 प्रतिशत की सीमा लागू करना चाहते हैं। मध्यावधि चुनावों से पहले ‘किफायती लागत’ को बड़ा मुद्दा बनाते हुए राष्ट्रपति उपभोक्ताओं को राहत देने का दावा कर रहे हैं। हालांकि बैंकिंग सेक्टर का मानना है कि यह फैसला बाजार आधारित व्यवस्था के खिलाफ है और इससे वित्तीय प्रणाली में अनिश्चितता बढ़ेगी।

पहले राहत, अब टकराव

ट्रंप प्रशासन के शुरुआती कदमों को बैंकों ने राहत के रूप में देखा था। जुलाई में ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल’ पर हस्ताक्षर के बाद कर कटौती के नए दौर की शुरुआत हुई और उपभोक्ता वित्तीय संरक्षण ब्यूरो के बजट में लगभग आधी कटौती कर दी गई। इसके साथ ही नियामकीय ढील के एजेंडे ने बैंकों और बड़े कॉरपोरेट को संतुष्ट किया था। लेकिन क्रेडिट कार्ड ब्याज दरों पर सीमा लगाने के प्रस्ताव ने इस रिश्ते में दरार डाल दी है।

फेड की स्वतंत्रता पर चिंता

बीएनवाई मेलॉन के सीईओ रॉबिन विंस ने चेतावनी दी कि ब्याज दरों में राजनीतिक हस्तक्षेप से फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता पर सवाल उठेंगे। उनका कहना है कि इससे बॉन्ड बाजार की नींव हिल सकती है और ब्याज दरें घटने के बजाय बढ़ सकती हैं। बैंकों की साझा चिंता यह है कि अगर फेड पर भरोसा कमजोर पड़ा तो उधारी की लागत और महंगी हो सकती है।

शेयर बाजार में दिखा असर

ट्रंप के बयान के बाद क्रेडिट कार्ड कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट आई। अमेरिकन एक्सप्रेस, जेपी मॉर्गन, सिटीग्रुप और कैपिटल वन जैसी कंपनियों के शेयर लुढ़क गए। निवेशकों को डर है कि ब्याज दरों पर सीमा लगने से बैंकों के मुनाफे पर बड़ा असर पड़ेगा और क्रेडिट कार्ड कारोबार की पूरी संरचना बदल सकती है।

उद्योग की रणनीति

जेपी मॉर्गन के मुख्य वित्तीय अधिकारी जेफरी बार्नम ने संकेत दिया कि बैंकिंग उद्योग इस फैसले के खिलाफ सभी कानूनी और नीतिगत विकल्प अपनाने को तैयार है। उन्होंने कहा कि यदि ब्याज दरों पर सीमा लागू होती है तो उद्योग इसे चुनौती देगा। जेपी मॉर्गन चेस के सीईओ जेमी डिमोन ने कहा कि वे फेडरल रिजर्व के हर फैसले से सहमत न हों, लेकिन चेयरमैन जेरोम पॉवेल के प्रति उनके मन में सम्मान है। डिमोन ने जोर देकर कहा कि वित्तीय स्थिरता के लिए केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता बेहद जरूरी है।

कम आय वर्ग पर असर की दलील

डेल्टा एयरलाइन्स के सीईओ एड बैस्टियन ने चेतावनी दी कि ब्याज दरों पर सीमा लगाने से सबसे ज्यादा नुकसान कम आय वर्ग के उपभोक्ताओं को होगा। उनके मुताबिक, बैंक जोखिम के चलते ऐसे ग्राहकों को क्रेडिट देना ही बंद कर सकते हैं, जिससे उनकी वित्तीय पहुंच सीमित हो जाएगी।

स्वाइप फीस पर भी प्रहार

तनाव को और बढ़ाते हुए ट्रंप ने सीनेटर रोजर मार्शल द्वारा पेश ‘क्रेडिट कार्ड प्रतिस्पर्धा अधिनियम’ का समर्थन किया है। इस विधेयक का उद्देश्य व्यापारियों से वसूले जाने वाले ‘स्वाइप शुल्क’ पर लगाम लगाना है। बैंकों को आशंका है कि यह कदम उनके राजस्व पर एक और चोट करेगा।

आगे की रणनीति

ट्रंप के क्रेडिट कार्ड ब्याज घटाने के फरमान ने बैंकिंग जगत को एकजुट कर दिया है। अब यह टकराव केवल नीतिगत नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर भी अहम बन गया है। आने वाले दिनों में यह लड़ाई तय करेगी कि अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था में नीति का पलड़ा भारी रहेगा या बाजार की स्वतंत्रता का।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *