RTO छूट का नोटिफिकेशन अटका, ग्वालियर व्यापार मेले में 1000 गाड़ियों की डिलीवरी रुकी
ग्वालियर: ग्वालियर व्यापार मेला वर्षों से लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा है. खासकर इस मेले में दशकों से वाहन खरीदारों को फायदा होता आया है. इसकी वजह है मेले में मिलने वाली विशेष 50 प्रतिशत आरटीओ टैक्स छूट जो ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए मेला को गुलजार कर देती है. इस साल भी ग्वालियर में छूट का ऐलान हो चुका है लेकिन व्यापारियों को इस बात की खुशी के साथ साथ इस बार व्यापार कम होने चिंता भी सता रही है.
इस बार मेले में वाहन खरीदी पर डबल मुनाफा
असल में ग्वालियर व्यापार मेला में प्रतिवर्ष वाहन खरीदी पर आरटीओ टैक्स में 50 फीसदी की छूट मिलती आई है. जिसकी वजह से कई ग्राहक साल भर अपनी पसंदीदा गाड़ी खरीदने का इंतजार करते हैं. क्योंकि छूट की वजह से उन्हें वाहन आम दिनों के अपेक्षा सस्ता मिलता है. इस बार तो जीएसटी की कटौती और फिर आरटीओ की छूट ग्राहकों के साथ साथ वाहन डीलरों के लिए भी त्योहार से कम नहीं होने वाला था.
क्योंकि उम्मीद जतायी जा रही थी कि इस बार पिछले सालों के मुकाबले ज़्यादा गाड़ियों की बुकिंग होगी. अब गाड़ियां तो बुक हो रही हैं लेकिन अभी तक ग्राहक उनकी डिलीवरी नहीं ले रहे. वजह है लोगों को अभी भी छूट के नोटिफिकेशन का इंतजार है. जिससे उन्हें पता चल सके उनकी गाड़ी कितनी सस्ती मिलने वाली है.
20 दिन की देरी ने घटाया छूट का समय
इस छूट को लेकर डीलर भी चिंता में दिखाई दे रहे हैं. क्योंकि पहले के मुकाबले इस बार छूट मिलने में दो हफ़्ते देरी हो चुकी है और ऊपर से अब जब कैबिनेट में आरटीओ छूट को मंजूरी मिल गई है तो अब तक नोटिफिकेशन नहीं आया. वाहन कंपनियों के डीलरों ने अपने शोरूम में गाड़ियां सजा ली हैं और ग्राहक भी बुकिंग कराने लगे हैं. लेकिन इन व्यापारियों का मानना है कि, आरटीओ टैक्स में छूट देरी से मिल रही इसकी वजह से अब ग्वालियर मेले में छूट के साथ गाड़ियां बेचने के लिए महज 1 महीने का ही समय मिलेगा. दूसरा उज्जैन मेले में भी आरटीओ छूट दिए जाने से कुछ हद तक इसका प्रभाव ग्वालियर मेला की बिकवाली पर भी पड़ेगा.
छूट नोटिफिकेशन के चलते अटकी गाड़ियों की डिलीवरी
ग्वालियर के निकुंज मोटर्स की और से मेले में शोरूम मैनेजर सुजा-उल-रहमान का कहना है कि, ''ग्वालियर व्यापार मेला में अभी शोरूम लगाए कुछ ही दिन हुए हैं लेकिन 1 हज़ार से ज़्यादा गाड़ियां बुक हो चुकी हैं. कई लोग हैं जो 50 प्रतिशत आरटीओ की छूट की वजह से फाइनल पेमेंट के लिए रुके हैं. अब जब अनाउंसमेंट हो गया है तब कई लोग पेमेंट भी कर रहे हैं. नोटिफिकेशन आने के बाद आरटीओ मेले में बैठने लगेंगे तो वेरिफिकेशन शुरू हो पाएंगे और गाड़ियां डिलीवर होने लगेंगी.''
उज्जैन मेले में भी छूट से पड़ेगा व्यापार पर सीधा असर
शो रूम मैनेजर रहमान का कहना है कि, "उज्जैन में भी कुछ समय से गाड़ियों पर आरटीओ छूट दी जाने लगी है. इसका इंपैक्ट ग्वालियर में भी पड़ा है, क्योंकि उज्जैन, इंदौर, भोपाल, रीवा, सतना से आने वाले ग्राहक रुक गए. अब ये ग्राहक उज्जैन मेले से ही गाड़ी ले लेते हैं. अब ये मेला ग्वालियर के आसपास के क्षेत्रीय ग्राहकों तक सीमित हो गया है. उज्जैन मेले से अब ग्राहकी पर सीधे 25 फ़ीसदी तक इंपैक्ट आयेगा.
लग्जरी ब्रांड पर फायदा, ग्वालियर नहीं आयेगा बाहर का ग्राहक
ग्वालियर के ऑटो डीलर अनंत टोयोटा के मेला शोरूम मैनेजर आशीष कौशल भी कहते हैं, ''उनके पास अब तक 400-500 गाड़ियों की बुकिंग आ चुकी है, लेकिन डिलीवरी आरटीओ छूट के लागू होने के इंतज़ार में रुकी हुई हैं." वहीं उज्जैन मेले में आरटीओ की छूट की वजह से ग्वालियर में भी ग्राहकी पर असर की बात आशीष ने भी कही.
उनका कहना था कि, "पहले ग्वालियर व्यापार मेले में इंदौर मालवा क्षेत्र से लोग मर्सेडीज, रेंज रोवर ऑडी जैसी महंगी गाड़ियां खरीदने आते थे. क्योंकि उन पर आरटीओ टैक्स की अच्छी बचत हो जाती थी. लेकिन अब इनके ग्राहक उज्जैन ही रुक जाते हैं. उज्जैन मेले से ग्वालियर में भी 20 से 30 प्रतिशत का डाउन सेल का असर देखने को मिल सकता है.
मेला छूट पर एमपी चेम्बर ऑफ कॉमर्स की अपनी राय
आरटीओ टैक्स छूट पर मध्य प्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स की भी अपनी राय है. एमपी चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ग्वालियर के मानसेवी सचिव दीपक अग्रवाल का कहना है कि, ''हर साल ही सरकार से आरटीओ की छूट ग्वालियर व्यापार मेला में मिलती आई है. लेकिन उसके लिए हर बार प्रतिनिधि मंडल मिलते हैं. बार बार ज्ञापन दे रहे हैं तब छूट पर फैसला होता है क्यों सरकार इन चीज़ों का इंतज़ार करती है.
मेला 25 दिसंबर को शुरू होता है, दिसंबर के पहले हफ़्ते में ही सरकार को ऐलान कर देना चाहिए कि मेले के साथ ही आरटीओ छूट लागू हो जाएगी. आज के समय में इस छूट को एक एक महीने तक टालना कहीं से उचित नहीं है. क्योंकि इससे ऑटो मोबाइल सेक्टर के डीलर भी टेंशन में रहते हैं उसे पहले से अपना स्टॉक मांगना पड़ता है. उन्हें बहुत दिक्कतें आती हैं, सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए.''

