नियद नेल्ला नार में आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत

रायपुर :  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुकमा जिले के दूरस्थ नियद नेल्लानार क्षेत्रों में मनरेगा और मत्स्य पालन योजना के संयुक्त प्रयास से ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। इस सत्र में स्वीकृत 150 आजीविका डबरियों ने खेती को मजबूती दी है। साथ ही 30 चयनित ग्रामीणों को वैज्ञानिक पद्धति से मछली पालन का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने का मार्ग प्रदान किया जा रहा है।

मत्स्य पालन को भी बढ़ावा देना

'नियद नेल्ला नार' छत्तीसगढ़ की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य नक्सल प्रभावित सुदूर क्षेत्रों (सुकमा, बीजापुर, कांकेर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर) के ग्रामीणों को मनरेगा और अन्य योजनाओं से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है, जिसमें मत्स्य पालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जैसे मनरेगा के तहत तालाब निर्माण और मछली पालन प्रशिक्षण के ज़रिए ग्रामीणों की आय बढ़ाना और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना है, ताकि वे जल संरक्षण के साथ-साथ आय के नए स्रोत भी विकसित कर सकें।

कलेक्टर और जिला सीईओ के मार्गदर्शन में ग्रामीण स्वरोजगार केंद्र द्वारा दिए जा रहे इस प्रशिक्षण से अब वनांचल के लोगों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध हो रहा है। इससे उनकी पारिवारिक आमदनी बढ़ेगी और वे बच्चों की शिक्षा तथा जीवन-स्तर सुधारने में सक्षम होंगे।

प्रशिक्षण से मिली नई दिशा- सोमारू की प्रेरक कहानी

आरसेटी सुकमा में आयोजित मत्स्य पालन प्रशिक्षण ने सुदूर क्षेत्रों के ग्रामीणों के लिए स्वावलंबन का नया रास्ता खोला है। इसका प्रेरक उदाहरण कोंटा विकासखंड के पालेम निवासी सोमारू हैं। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने मछली के जीवनचक्र, पालन तकनीक और देखभाल की सभी बारीकियाँ ध्यानपूर्वक सीखी और रेखाचित्रों के माध्यम से समझ भी विकसित की।

सोमारू का कहना है कि इस उन्नत और तकनीकी प्रशिक्षण से वे भविष्य में मछली पालन को एक सफल व्यवसाय के रूप में स्थापित कर पाएँगे। उन्होंने इस लाभदायक पहल के लिए शासन का आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप को धन्यवाद दिया है। उनका मानना है कि यह योजना ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *