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ईरान की हिंसा पर लारीजानी ने ट्रंप और नेतन्याहू को बताया असली कातिल

तेहरान। ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने अब एक बेहद हिंसक और भयावह मोड़ ले लिया है। पिछले दो हफ्तों से जारी इस उथल-पुथल में मरने वालों की संख्या आधिकारिक तौर पर 2,000 के पार पहुंच गई है, जिसके बाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने मंगलवार को एक कड़ा बयान जारी करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को ईरानी जनता का मुख्य हत्यारा करार दिया है। लारीजानी का यह हमला तब आया जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान में हो रहे रक्तपात के विरोध में ईरानी अधिकारियों के साथ प्रस्तावित सभी बैठकें रद्द कर दीं और प्रदर्शनकारियों को सरकारी संस्थानों पर कब्जा करने का आह्वान किया।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव और पूर्व संसद अध्यक्ष अली लारीजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सीधे तौर पर वॉशिंगटन और तेल अवीव को इस अशांति का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने अपनी पोस्ट में स्पष्ट रूप से लिखा, हम ईरानी जनता के असली कातिलों के नाम घोषित करते हैं। पहला ट्रंप और दूसरा नेतन्याहू। लारीजानी ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल सुनियोजित तरीके से देश के भीतर अस्थिरता पैदा कर रहे हैं और हिंसा भड़का रहे हैं।
दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया संदेश ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मचा दी है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर प्रदर्शनकारियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा, ईरानी देशभक्तों, विरोध जारी रखो। अपने संस्थानों पर कब्जा कर लो! मदद आ रही है। हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह मदद सैन्य होगी या आर्थिक, लेकिन उनके इस बयान ने आग में घी डालने का काम किया है। एक साक्षात्कार के दौरान ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शनकारियों को फांसी देने का सिलसिला शुरू हुआ, तो अमेरिका बेहद कड़ी कार्रवाई करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक निर्दोषों की हत्याएं नहीं रुकतीं, ईरान के साथ किसी भी स्तर की बातचीत संभव नहीं है।
मानवाधिकार संस्थाओं और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, ईरान में स्थिति अब गृहयुद्ध जैसी होती जा रही है। कार्यकर्ताओं का दावा है कि अब तक कम से कम 2,003 लोग मारे गए हैं, जबकि कुछ अंतरराष्ट्रीय सूत्र यह संख्या 12,000 से 20,000 के बीच होने की आशंका जता रहे हैं। ईरानी सरकारी मीडिया ने भी अब अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार किया है कि देश में कई शहीद हुए हैं। इस पूरे संकट की जड़ में ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था और मुद्रा का गिरता मूल्य है, जिसने अब सत्ता परिवर्तन की उग्र मांग का रूप ले लिया है। ट्रंप ने आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए यह भी घोषणा की है कि जो देश ईरान के साथ व्यापार करेंगे, उन पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा, जिससे ईरान की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

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