दूषित पानी की जांच करने इंदौर पहुंची NIRBI टीम, अभी तक रहस्य बना जानलेवा संकमण

इंदौर: देशभर में इंदौर दूषित पानी का मामला चर्चाओं में बना हुआ है. सीएमएचओ के मुताबिक अभी भी 149 मरीज संक्रमित हैं. जबकि सरकारी आंकड़ों की माने तो 6 लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन दावा 16 मौतों का किया जा रहा है. वहीं नेशनल मुद्दा बनते इस मामले की जांच करने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बैक्टीरियोलॉजी (National Institute for Research in Bacterial Infections) की टीम इंदौर पहुंची है. जो लोगों के संक्रमित होने और मौतों के वजह की जांच करेगी.

एम्स कोलकाता और एम्स भोपाल की टीम पहुंची इंदौर

भागीरथपुरा दूषित पानी मामले की जांच करने एम्स कोलकाता और एम्स भोपाल की टीम इंदौर पहुंची है. यह टीम भागारथपुरा से पानी के सैंपल लेकर बैक्टीरिया की जांच करेगी. जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आखिर पानी में ऐसा क्या है, जिसकी वजह से लोग संक्रमित हुए और कई लोगों की मौत हुई. इसके साथ ही नेशनल हेल्थ मिशन की डायरेक्टर सलोनी सिडाना भी इंदौर पहुंची हैं. जहां उन्होंने अस्पतालों में पहुंचकर मरीजों का हाल जाना.

रविवार सुबह रिंग सर्वे कार्य शुरू

इसके साथ ही भागीरथपुरा इंदौर में स्वास्थ्य विभाग ने एक मजबूत रणनीति को अपनाते हुए रिंग सर्वे प्रारंभ किया है. रविवार सुबह कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल भागीरथपुरा क्षेत्र पहुंचे. यहां उन्होंने रिंग सर्वे में जुटी टीमों को समझाइश देते हुए रहवासियों से भी चर्चा की. वहीं स्टेट सर्विलांस टीम ने भी लिए पानी के सैंपल लिए. सर्विलांस अधिकारी अश्विन भागवत ने बताया कि "भागीरथपुरा से पानी के सैंपल लिए गए हैं. इन सैंपल की भोपाल स्थित लैब में जांच की जाएगी."

रिंग सर्वे का आशय यह है कि भागीरथपुरा में जो भी हॉट स्पॉट मिले हैं, उनके घरों के आस-पास 50 घरों का सर्वे किया गया. रिंग सर्वे के लिए 20 टीमें क्षेत्र में कार्यरत हैं. कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देशानुसार क्षेत्र में 06 एम्बुलेंस लगाई गई हैं. साथ ही क्षेत्र में 24×7 चिकित्सकों की ड्यूटी क्षेत्र में लगाई गई है.

मरीजों की मॉनिटरिंग के लिए बनाई टीम

मामले में संभाग आयुक्त डॉ सुदाम खाड़े ने कहा कि "भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए भी पर्याप्त प्रबंधन प्रारम्भ किये गए हैं. इसके अलावा जो भी मरीज है, उनकी मॉनिटरिंग के लिये टीम लगाई गई है. मरीजों को अच्छे अस्पताल में शिफ्ट भी कर रहे हैं. उन्होंने बताया सभी मरीजों को क्लोरीन की गोली के अलावा पानी स्वच्छ करने की ड्रॉप और ओआरएस और जिंक की गोलियां प्रत्येक घर में बांटी जा रही हैं. इसके अलावा विभिन्न मेडिकल विशेषज्ञ और डॉक्टर से संक्रमण के स्तर और उससे होने वाली मौतों की पड़ताल की जा सकेगी."

भागीरथपुरा में खोदे जा रहे 80 ट्यूबवेल

बताते चलें भागीरथपुरा में साफ पानी के लिए 80 ट्यूबवेल खोदे जाने के बाद उनके क्लोरिनेशन का कार्य चल रहा है. वहीं मरीजों को हुए संक्रमण की पड़ताल अब एम्स कोलकाता और भोपाल की टीम करेगी. लगातार सामने आ रहे मरीज और उनके संक्रमण के फलस्वरुप संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने शनिवार को भी जिला प्रशासन, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग द्वारा भागीरथपुरा क्षेत्र में किए गए मैसिव रिंग सर्वे कार्य की समीक्षा की. उन्होंने बताया कि दिन भर में 80 से अधिक ट्यूबेल का क्लोरीनेशन किया है और उसका लगातार टेस्टिंग किया जाएगा. क्षेत्र में जब तक साफ पानी नहीं बनता, तब तक क्षेत्र में जल सप्लाई नहीं किया जाएगा.

 

 

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हसानी के मुताबिक "इंदौर में दूषित पानी से 6 लोगों की मौत हो चुकी है. इसके अलावा जो मौत के आंकड़ें आ रहे हैं, उनकी जांच की जा रही है. साथ ही 149 मरीज अभी भी एक्टिव हैं, जिसमें से 2 वेंटिलेटर पर हैं."

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